बंगाल: बंद कारखानों की जमीन से बंगाल में बनेगा लैंड बैंक, निवेश के लिए भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी
पश्चिम बंगाल सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बंद कारखानों और सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन का उपयोग कर एक लैंड बैंक बनाने की तैयारी कर रही है।

बंद कारखानों की जमीन से बनेगा औद्योगिक लैंड बैंक
HighLights
बंद कारखानों की जमीन से बनेगा औद्योगिक लैंड बैंक
'प्रोजेक्ट भूमिशक्ति' से निवेश के लिए भूमि उपलब्ध होगी
कानूनी अड़चनें और अतिक्रमण प्रमुख चुनौतियां हैं
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और कंपनियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार बंद कारखानों और सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है।
इसके तहत बंद केंद्रीय व राज्य सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू), बीमार औद्योगिक इकाइयों, जूट मिलों और सूती मिलों की जमीन को एक लैंड बैंक के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी जमीन की पहचान कर उसे औद्योगिक विकास के लिए उपयोगी बनाना है, ताकि नए निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने में आसानी हो और मौजूदा औद्योगिक भूमि का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। इस संबंध में राज्य के उद्योग मंत्री तापस राय के नेतृत्व में मंत्रियों के समूह (जीओएम) की हाल में बैठक भी हुई है।
बंद कारखानों की जमीन से बनेगा औद्योगिक लैंड बैंक
औद्योगिक जमीन की पहचान, उसके पुनर्विकास और निवेश के लिए उपयोगी बनाने की इस पहल के लिए ‘प्रोजेक्ट भूमिशक्ति’ नाम से एक रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई है।
एक वाणिज्यिक संगठन ने यह खाका तैयार किया है। इसके तहत राज्य में जमीन के कई संभावित भूखंडों की पहचान की गई है, जिनका इस्तेमाल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस पहल में केवल बंद सरकारी उपक्रमों की जमीन ही नहीं, बल्कि कुछ बंद निजी कंपनियों और केंद्रीय व निजी क्षेत्र की जूट एवं सूती मिलों की जमीन को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। नई सरकार की कोशिश है कि उपलब्ध जमीन को नए उद्योगों के लिए उपयोगी बनाकर निवेश की प्रक्रिया आसान की जाए।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता आसान बनाने के उद्देश्य से लैंड बैंक तैयार किए जा रहे हैं।
कानूनी विवाद और अतिक्रमण भी चुनौती
हालांकि, बंद औद्योगिक इकाइयों की जमीन को नए इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराना इतना आसान नहीं है। उद्योग विभाग के सूत्रों के अनुसार, कई भूखंडों पर कानूनी अड़चनें हैं।
इसके अलावा, लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी कुछ जमीन पर अतिक्रमण और अन्य समस्याएं भी सामने आई हैं। ऐसे में जमीन की पहचान के साथ उसके स्वामित्व, कानूनी स्थिति और वास्तविक उपलब्धता का समाधान करना महत्वपूर्ण होगा। इसको लेकर राज्य सरकार के अधिकारी केंद्र के भी संपर्क में हैं।
राज्य सरकार के सामने चुनौती यह है कि ऐसी जमीन को निवेश के अनुकूल बनाने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएं और औद्योगिक विकास में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए। जमीन उपलब्ध होने से नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार में मदद मिल सकती है।
जमीन की उपलब्धता लंबे समय से रही है मुद्दा
बताते चलें कि बंगाल में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए जमीन की उपलब्धता लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। बंद इकाइयों की जमीन का इस्तेमाल इस दिशा में एक विकल्प बन सकता है।
हालांकि, लैंड बैंक में कितनी जमीन शामिल होगी, ऐसे भूखंडों की संख्या, कुल क्षेत्रफल और किन स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी आदि जानकारी साझा करने से विभाग ने फिलहाल इन्कार किया है।
बताते चलें कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बंगाल सरकार कालीपूजा व दिवाली से पहले पांच नवंबर को नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई नीति में पारदर्शी भूमि आवंटन व्यवस्था, निवेश प्रोत्साहन और बिजली शुल्क में सब्सिडी जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई नीति में लैंड बैंक को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
