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बंगाल में पास-फेल वापसी से पहले बड़ी चुनौती, 4 हजार से ज्यादा स्कूलों में छात्र नहीं; शिक्षक भी कम

Published: Tue, 27 Oct 2026 09:05 PM (IST)

बंगाल में पास-फेल व्यवस्था की वापसी से पहले शिक्षा की बुनियादी चुनौतियां सामने आई हैं। शिक्षकों की कमी, छात्रों की अनुपस्थिति और सुविधाओं का अभाव मुख्य समस्याए हैं।

बंगाल में पास-फेल वापसी से पहले बड़ी चुनौती। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बंगाल में पास-फेल वापसी से पहले बड़ी चुनौती। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. बंगाल में पास-फेल व्यवस्था की वापसी पर गंभीर चर्चा।

  2. 4 हजार से अधिक स्कूलों में छात्रों की अनुपस्थिति बड़ी समस्या।

  3. शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव मुख्य चुनौती।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में स्कूलों में पास-फेल व्यवस्था फिर से लागू करने की चर्चा के बीच शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी चुनौतियां सामने आने लगी हैं।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस व्यवस्था को शुरू करने का संकेत दिया है, लेकिन शिक्षकों और शिक्षा संगठनों का मानना है कि केवल परीक्षा में उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण की व्यवस्था बहाल करने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा। इसके लिए पहले स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है।

राज्य में चार हजार से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों का नहीं होना और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों व छात्रों के अनुपात में असंतुलन इस चुनौती को और गंभीर बनाता है। चुनौती केवल परीक्षा में उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण घोषित करने की नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बेहतर बनाने की भी है।

राज्य के स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपलब्धता का असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद शिक्षक कम हैं, जबकि शहरी इलाकों के अनेक सरकारी स्कूल विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं।

शिक्षक संगठनों के अनुसार, उत्सश्री पोर्टल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से शिक्षकों के शहरों में स्थानांतरण और लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं होने से स्थिति प्रभावित हुई है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण भी अभिभावकों का रुझान निजी स्कूलों की ओर बढ़ा है।

आल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के महासचिव तरुण नस्कर ने पास-फेल व्यवस्था बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बुनियादी सुविधाओं में सुधार के बिना इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच में रुकने और नौकरी गंवा चुके शिक्षकों की अनिश्चितता का भी उल्लेख किया।

ऐसे में सवाल यह है कि कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त पढ़ाई देने के लिए स्कूलों के पास पर्याप्त शिक्षक और संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं।

इसलिए पास-फेल व्यवस्था की बहाली के साथ शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा। अन्यथा परीक्षा प्रणाली में बदलाव से अपेक्षित शैक्षणिक सुधार हासिल करना मुश्किल हो सकता है।