बंगाल: दुर्गापूजा में अस्पतालों की बदहाली के बाद शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, डॉक्टरों की छुट्टी पर लगी रोक
दुर्गापूजा के दौरान अस्पतालों में खराब स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की लंबी छुट्टी के कारण हुई परेशानियों के बाद, पश्चिम ...और पढ़ें

बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी।
HighLights
पूजा में डॉक्टरों की लंबी छुट्टी पर रोक लगेगी।
सिलीगुड़ी अस्पताल में 128 मरीजों की मौत हुई।
जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रही थी व्यवस्था।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। दुर्गापूजा के दौरान बंगाल के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे सवालों के बीच राज्य सरकार ने अगले वर्ष से पूजा के दौरान डाक्टरों को एक साथ लंबी छुट्टी नहीं देने का फैसला किया है। इस वर्ष त्योहार के दौरान सीनियर डाक्टरों की कमी और ड्यूटी रोस्टर के कथित तौर पर सही ढंग से लागू नहीं होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज व अस्पताल (एनबीएमसीएच) में 16 से 21 अक्टूबर के बीच छह दिनों में 128 मरीजों की मौत हुई है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ ब्राड डेथ और दूसरे अस्पतालों से गंभीर अवस्था में रेफर किए गए स्ट्रोक के मरीज भी शामिल थे।
एनबीएमसीएच सूत्रों के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान अस्पताल के कई सीनियर डाक्टर एक सप्ताह से लेकर 10 दिनों तक की छुट्टी पर थे। इसका असर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर पड़ने की बात सामने आई है।
सूत्रों का दावा है कि कुछ विभागों में विभागाध्यक्ष तक उपलब्ध नहीं थे और व्यवस्था मुख्य रूप से जूनियर डाक्टरों तथा पीजीटी प्रशिक्षुओं के भरोसे चल रही थी। इस दौरान गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
एनबीएमसीएच के अधीक्षक डा. कौशिक इशोर ने कहा कि पूजा के दौरान हुई मौतों में कुछ ब्राड डेथ के मामले थे। वहीं, कुछ मरीज स्ट्रोक से पीड़ित थे और उन्हें दूसरे अस्पतालों से गंभीर अवस्था में रेफर किया गया था।
इधर,सरकारी घोषणा के बावजूद सिलीगुड़ी जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल की कई विभागीय ओपीडी में डाक्टरों के उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई। सुबह से ही सैकड़ों मरीज पर्ची कटाने के लिए कतार में लगे रहे, लेकिन डाक्टरों के नहीं आने के कारण कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
मरीजों ने आरोप लगाया कि पर्ची काउंटर पर लंबी कतारें थीं, लेकिन संबंधित विभागों में डाक्टर उपलब्ध नहीं थे। इससे दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
रोस्टर के बावजूद क्यों प्रभावित हुईं सेवाएं?
पूजा से पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्देश जारी कर अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं सामान्य बनाए रखने को कहा गया था। इसके लिए ड्यूटी रोस्टर भी तैयार किए गए थे। इसके बावजूद रोस्टर के समुचित पालन को लेकर सवाल उठे। एनबीएमसीएच के साथ सिलीगुड़ी जिला अस्पताल की सेवाओं पर भी डाक्टरों की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हुए।
इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने अगले वर्ष से पूजा के दौरान डाक्टरों को एक साथ लंबी छुट्टी नहीं देने की घोषणा की है। इस फैसले का उद्देश्य त्योहार के दौरान अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना माना जा रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाएगा और छुट्टियों के लिए क्या नियम होंगे, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
