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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

West Bengal: दुर्गा पूजा में कमल फूलों की भारी डिमांड, मौसम की बेरुखी से खेती पर हुआ असर

By Jagran NewsEdited By: Abhinav Atrey
Published: Thu, 19 Oct 2023 07:12 PM (GMT+05:30)

दुर्गा पूजा के दौरान कमल के फूल की काफी मांग रहती है। समय से बारिश नहीं होने के कारण फूल ...और पढ़ें

मांग से कम आपूर्ति, दुर्गा पूजा में और महंगा हुआ कमल का फूल (फाइल फोटो)
मांग से कम आपूर्ति, दुर्गा पूजा में और महंगा हुआ कमल का फूल (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मांग से कम आपूर्ति, दुर्गा पूजा में और महंगा हुआ कमल का फूल
  2. महानवमी तक एक फूल की कीमत 50-55 रुपये होने के आसार
  3. पूर्व मेदिनीपुर कमल फूल की खेती के लिए महत्वपूर्ण जगह
  4. मौसम की बेरुखी का कमल की खेती पर खासा असर
  5. अंतिम समय में कमल की कीमत और बढ़ सकती है

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दुर्गा पूजा के दौरान कमल के फूल की काफी मांग रहती है। समय से बारिश नहीं होने के कारण फूल की उपज में काफी कमी हो गई है, ऊपर से हाल ही में हुई भारी बारिश ने कमल फूल की खेती को बर्बाद कर दिया है। कुल मिलाकर इस बार पूजा के दौरान कमल फूल काफी महंगे दाम पर बिक रहा है।

इसके अलावा, जिस तरह से पूजा आयोजित करने की संख्या बढ़ी है, मांग को पूरा करने के लिए कमल फूलों की आपूर्ति करना मुश्किल होता जा रहा है। व्यापारियों को डर है कि अगर बाहर से कमल नहीं आएगा तो हर जगह कमल की मांग पूरी कर पाना संभव नहीं होगा।

भगवान राम ने कमल फूल से देवी की पूजा की थी

दुर्गा पूजा के दौरान 108 कमल के फूल चढ़ाने की प्रथा है। कहा जाता है कि रावण का वध करने से पहले भगवान राम ने इसी प्रकार कमल फूल से ही पूजा करके मां दुर्गा की आराधना करके देवी को प्रसन्न किया था। आज भी लोग इस परंपरा को जारी रखे हुए हैं। यही कारण है कि दुर्गा पूजा के दौरान कमल फूल की मांग आसमान छू जाती है।

पूर्व मेदिनीपुर कमल फूल की खेती के लिए महत्वपूर्ण जगह

पश्चिम बंगाल के अन्य स्थानों के साथ-साथ पूर्व मेदिनीपुर जिला कमल फूल की खेती के लिए एक महत्वपूर्ण जगह है। सालों से पांशकुड़ा, कोलाघाट, तमलुक के विशाल क्षेत्र से कमल फूल राज्य के बाजार में कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिले की जरूरतों को पूरा करने के अलावा, मेदिनीपुर का कमल अन्य जिलों और कोलकाता तक भी आता है। हर साल कमल की खेती चैत्र महीने से शुरू होती है, और आश्विन या दुर्गा पूजा के अंत तक जारी रहती है। कमल फूल को अधिकतम 15 दिनों तक भंडारित किया जा सकता है।

मौसम की बेरुखी का कमल की खेती पर खासा असर

पांशकुड़ा के कमल किसान ब्रजबिहारी दास कहते हैं कि इस बार मौसम की बेरुखी का कमल की खेती पर खासा असर पड़ा है। एक ओर जहां समय पर बारिश नहीं होने से पैदावार घटी है, वहीं दूसरी ओर ऐन वक्त पर भारी बारिश के कारण फूल नष्ट हो गए हैं। परिणामस्वरूप, कमल बाजार में मांग की तुलना में आपूर्ति की भारी कमी हो गई है।

अंतिम समय में कमल की कीमत और बढ़ सकती है

एक अन्य फूल उत्पादक सुधांशु जाना कहते हैं कि पिछले साल भी कमल फूल का बाजार बहुत ऊंचा था। उस समय प्रति फूल कीमत 35 से 40 रुपये तक पहुंच गई थी। इस बार महासप्तमी, महाष्टमी और महानवमी को एक फूल की कीमत 50 से 55 रुपये के आसपास होने की बात कही जा रही है। यही नहीं कहा जा रहा है कि अंतिम समय में कमल की कीमत और भी बढ़ सकती है।

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