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​​​​​बंगाल में फर्जी चिकित्सकों पर कसेगा शिकंजा, निजी अस्पतालों के लिए चार सूत्रीय निर्देश जारी

Published: Fri, 02 Oct 2026 04:52 PM (IST)

स्वास्थ्य विभाग ने पश्चिम बंगाल के निजी अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति रोकने के लिए चार सूत्रीय निर्देश जारी ...और पढ़ें

फर्जी चिकित्सकों की नियुक्ति रोकने को चार सूत्रीय निर्देश जारी।

फर्जी चिकित्सकों की नियुक्ति रोकने को चार सूत्रीय निर्देश जारी।

HighLights

  1. फर्जी चिकित्सकों की नियुक्ति रोकने को चार सूत्रीय निर्देश जारी।

  2. मेडिकल काउंसिल पंजीकरण पुष्टि बिना चिकित्सक नियुक्ति नहीं होगी।

  3. उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। राज्य के निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम में फर्जी चिकित्सकों की नियुक्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चार सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जारी गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि राज्य मेडिकल काउंसिल में नाम और पंजीकरण की पुष्टि किए बिना किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।

स्वास्थ्य भवन ने सभी संबंधित संस्थानों से दो अक्टूबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। इसे ‘अत्यंत जरूरी’ बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 2017 के वेस्ट बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन, रेगुलेशन एंड ट्रांसपेरेंसी) रूल्स के नियम 7(4) के तहत चिकित्सकों के सभी आवश्यक दस्तावेज और पंजीकरण की जांच करने को कहा है।

किसी व्यक्ति की पहचान, शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण या चिकित्सा सेवा देने के अधिकार को लेकर संदेह होने पर संबंधित मेडिकल काउंसिल से तत्काल सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया है। बिना वैध पंजीकरण या अनुमति के चिकित्सक के रूप में काम करने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश में कहा गया है कि ऐसे मामलों में दोषी व्यक्ति को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। निर्देश पर स्वास्थ्य सेवा निदेशक स्वप्न सरेन के हस्ताक्षर हैं।

निजी अस्पतालों ने किया स्वागत, काउंसिल पर उठे सवाल

एसोसिएशन आफ प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंगहोम के सचिव राजीव पांडे ने सरकारी निर्देश का स्वागत करते हुए मेडिकल काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल योग्यताहीन लोगों को नियुक्त नहीं करेंगे, लेकिन फर्जी चिकित्सकों की समस्या पर सरकार को भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।

वेस्ट बंगाल डाक्टर्स फोरम के अध्यक्ष कौशिक चाकी ने भी स्वास्थ्य विभाग से और कड़े कदम उठाने की मांग की। उन्होंने मेडिकल काउंसिल में पूर्व सदस्य रहे चिकित्सक अभिक दे के मामले का उल्लेख करते हुए काउंसिल की पारदर्शिता पर सवाल उठाया और कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में अपनी कार्रवाई स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए।