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बंगाल: देशी खस्सी के मांस, सूखी झींगा मछली और हिल्सा उत्पादों को मिलेगा जीआई टैग, आवेदन मंजूर

Published: Thu, 29 Oct 2026 06:56 PM (IST)

पश्चिम बंगाल के देशी खस्सी के मांस, हिल्सा उत्पादों और सूखी झींगा मछली को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

देशी खस्सी मांस, हिल्सा, सूखी झींगा को जीआई टैग

देशी खस्सी मांस, हिल्सा, सूखी झींगा को जीआई टैग

HighLights

  1. देशी खस्सी मांस, हिल्सा, सूखी झींगा को जीआई टैग

  2. राज्य सरकार, नाबार्ड, एमएसएमई विभाग की सक्रिय पहल

  3. कुम्हारटोली प्रतिमाएं, जूट उत्पाद भी जीआई की दौड़ में

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के देशी खस्सी के मांस, हिल्सा मछली से बने उत्पादों और सूखी झींगा मछली को भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इन उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने की पहल तेज हुई है।

संबंधित क्षेत्रों के कलाकारों और कारोबारियों के संगठनों ने आवेदन की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाई है। जीआइ विशेषज्ञ रजनीकांत के अनुसार, राज्य सरकार के सहयोग, नाबार्ड के पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय और सूक्ष्म, लघु एवं कुटीर उद्योग तथा वस्त्र विभाग की सक्रियता से इस दिशा में काम आगे बढ़ा है।

जानकारी के मुतािबक देशी खस्सी के मांस, हिल्सा से बने उत्पादों और सूखी झींगा मछली के लिए इस महीने के पहले पखवाड़े में आवेदन मंजूर किए गए हैं। हालांकि, इन उत्पादों को अंतिम रूप से जीआइ टैग मिलने की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।

देशी खस्सी मांस, हिल्सा, सूखी झींगा को GI टैग

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अगले एक वर्ष के भीतर इन उत्पादों को यह पहचान मिल सकती है। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कल्याण चक्रवर्ती के अनुसार, कई उत्पादों के लिए आवेदन किए गए हैं।

इनमें देशी खस्सी का मांस और सूखी झींगा मछली शामिल हैं, जबकि हिल्सा से बने उत्पाद के लिए एक निजी संगठन ने आवेदन किया है। मंत्री ने कहा कि इन पहलों से राज्य के पारंपरिक उत्पादों की विशिष्टता और पहचान सामने आएगी।

जीआई विशेषज्ञ रजनीकांत ने बताया कि बंगाल के पारंपरिक उत्पादों को यह दर्जा दिलाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे। उनके मुताबिक, नई सरकार के गठन के बाद इस विषय पर उच्च स्तर पर बातचीत हुई। सूक्ष्म, लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग के प्रधान सचिव अनूप अग्रवाल ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग किया।

कुम्हारटोली की प्रतिमाओं पर भी नजर

बंगाल के पारंपरिक हस्तशिल्प को जीआइ पहचान दिलाने की पहल केवल मछली और मांस तक सीमित नहीं है। कोलकाता के कुम्हारटोली में बनने वाली दुर्गा प्रतिमाओं के लिए भी एक संगठन के माध्यम से आवेदन किया गया है।

विशेषज्ञ को उम्मीद है कि अगले दो-तीन महीनों में इस मामले में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। इसके अलावा बंगाल के जूट से बने औद्योगिक उत्पादों और चालताबेड़िया की टेराकोटा कला के लिए भी आवेदन मंजूर होने की जानकारी दी गई है।

सामान्य तौर पर जीआइ से जुड़े मामलों को राज्य का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देखता है, लेकिन इस बार सूक्ष्म, लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है।

जीआइ टैग मिलने से किसी क्षेत्र के विशिष्ट उत्पाद की भौगोलिक पहचान सुरक्षित होती है और उसकी बाजार में अलग पहचान बनाने में मदद मिल सकती है। बंगाल के पारंपरिक खाद्य उत्पादों और हस्तशिल्प को यह दर्जा मिलने पर स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों और कारोबारियों को लाभ मिलने की संभावना है।