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बंगाल में दुर्गापूजा अनुदान के लिए बैंक खाता अनिवार्य, हजारों समितियां परेशान

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:05 PM (IST)

पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गापूजा अनुदान के लिए पूजा समितियों के नाम पर पैन कार्ड और बैंक खाता अनिवार्य कर दिया है।

बंगाल में दुर्गापूजा अनुदान के लिए बैंक खाता अनिवार्य।

बंगाल में दुर्गापूजा अनुदान के लिए बैंक खाता अनिवार्य।

HighLights

  1. दुर्गापूजा अनुदान के लिए समिति के नाम पर बैंक खाता अनिवार्य।

  2. हजारों पूजा समितियों को कम समय में दस्तावेज तैयार करने में चुनौती।

  3. वित्तीय पारदर्शिता हेतु नए नियम को कुछ संगठनों का समर्थन।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दुर्गापूजा के सरकारी अनुदान को लेकर राज्य सरकार के नए नियम से कई पूजा समितियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। इस बार अनुदान के लिए आवेदन के साथ पूजा समिति के नाम का पैन कार्ड और बैंक खाते का विवरण देना अनिवार्य किया गया है।

अनुदान की राशि सीधे समिति के बैंक खाते में भेजी जाएगी। ऐसे में जिन समितियों का अपना खाता नहीं है, उन्हें कम समय में जरूरी दस्तावेज तैयार कराने की चुनौती है।

पिछले वर्षों में जिन समितियों के नाम पर पंजीकरण या बैंक खाता नहीं था, उन्हें किसी पदाधिकारी के पैन और बैंक खाते के जरिए अनुदान लेने की छूट मिलती थी। इस बार यह व्यवस्था नहीं होगी। आवेदन के साथ समिति के बैंक खाते का रद चेक और पासबुक की प्रति समेत अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

कई समितियों के अनुसार, पिछले वर्ष उनके व्यक्तिगत पैन और बैंक खाते के जरिए अनुदान मिला था। अब समिति के नाम पर खाता खोलने के लिए जरूरी पंजीकरण और दस्तावेज तैयार करने में समय की कमी आड़े आ रही है। दूसरी ओर, दुर्गोत्सव से जुड़े संगठनों के कुछ पदाधिकारियों ने समिति के नाम पर बैंक खाता अनिवार्य किए जाने को वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से उचित बताया है।

एक लाख रुपये अनुदान की घोषणा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सात सितंबर को पूजा समितियों के साथ बैठक में इस वर्ष प्रत्येक पूजा समिति को एक लाख रुपये का सरकारी अनुदान देने की घोषणा की थी। आर्थिक रूप से सक्षम बड़ी पूजा समितियों से अनुदान नहीं लेने का अनुरोध भी किया गया है। नए नियम के अनुसार अनुदान की राशि किसी पदाधिकारी के निजी खाते में नहीं जाएगी।

आधिकारिक पूजा अनुमति के लिए राज्य का ‘सहज’ पोर्टल भी चालू है। बंगाल में 2025 में 45,336 पूजा समितियों को 1.10 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था। इस बार राशि घटाकर एक लाख रुपये की गई है।