निजी स्कूलों में गड़बड़ी पर जिला प्राथमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष भी कर सकेंगे हस्तक्षेप, बंगाल के शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश
पश्चिम बंगाल में निजी स्कूलों की सुरक्षा, पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर अब जिला प्राथमिक शिक्षा परिषद (डीपीएससी) के अध्यक्ष भी हस्तक्षेप कर सकेंगे।

निजी स्कूलों की शिकायतों पर डीपीएससी अध्यक्ष अब हस्तक्षेप कर सकेंगे
HighLights
निजी स्कूलों की शिकायतों पर डीपीएससी अध्यक्ष अब हस्तक्षेप कर सकेंगे
सुरक्षा, पढ़ाई, अधिक फीस जैसे मुद्दों पर कार्रवाई की जाएगी
कोलकाता घटना के बाद निजी स्कूलों पर सरकारी निगरानी बढ़ी
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में निजी स्कूलों की सुरक्षा, पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर अब जिला प्राथमिक शिक्षा परिषद (डीपीएससी) के अध्यक्ष भी हस्तक्षेप कर सकेंगे।
स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने गुरुवार को उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद में आयोजित बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा कि जिले के किसी निजी स्कूल में पढ़ाई नहीं होने, अधिक फीस वसूलने या पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं होने की शिकायत मिलने पर डीपीएससी अध्यक्ष भी जानकारी ले सकते हैं।
हाल में कोलकाता के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में छात्र को चाकू मारे जाने की घटना के बाद निजी स्कूलों की सुरक्षा और उन पर सरकारी निगरानी का मुद्दा उठा था। अभिभावकों के एक वर्ग ने स्कूलों के नियमित निरीक्षण और सरकारी हस्तक्षेप की मांग की थी।
इसी संदर्भ में मंत्री ने कहा कि राज्य के स्कूलों की देखरेख और उनसे जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेना स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने डीपीएससी अध्यक्षों को भी अपने-अपने जिलों में सक्रिय रहने का संदेश दिया।
अंग्रेजी माध्यम बनाने के प्रस्ताव पर सवाल
बैठक में कम विद्यार्थियों वाले सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि यदि सभी सहमत हों तो राज्य के 81 हजार स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलने की बात कही जा सकती है।
उन्होंने हालांकि सवाल उठाया कि क्या केवल अंग्रेजी पढ़ने से बुद्धि बढ़ती है। उनका जोर स्कूलों की समस्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दूर करने और आपसी समन्वय से काम करने पर रहा।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों से किए गए वादों को मौजूदा व्यवस्था के भीतर पूरा करना होगा।
सरकार गठन के छह महीने बाद अब काम करके दिखाने का समय है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षण संस्थानों की समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया।
