बाल विवाह पर बंगाल सरकार सख्त, दोषियों की गिरफ्तारी के साथ सरकारी लाभ भी होंगे बंद
बंगाल सरकार बाल विवाह और किशोर उम्र में गर्भधारण के बढ़ते मामलों पर सख्त हो गई है, जिसके खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

बंगाल में बाल विवाह और किशोर गर्भधारण पर सरकार सख्त

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में बाल विवाह और किशोर उम्र में गर्भधारण (टीनएज डिलीवरी) के चौंकाने वाले आंकड़ों ने प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्य सचिवालय नवान्न में मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और पाक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों से शादी करने वालों के अलावा शादी कराने या इसमें सहयोग करने वाले लोगों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बंगाल में बाल विवाह और किशोर गर्भधारण पर सरकार सख्त
ऐसे मामलों में आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ भी बंद किए जाएंगे। जिन महिलाओं के बारे में पता चलेगा कि उनकी शादी नाबालिग उम्र में हुई थी, उनके पतियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
उन्हें अपनी पत्नी की उम्र का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। शुभेंदु ने कहा कि नाबालिगों की शादी कराने या इसमें मदद करने वाले पुरोहित और काजी को भी जेल भेजा जाएगा।
नाबालिग लड़की से शादी करने वाले पुरुष के साथ उसके और लड़की के परिवार के सदस्यों को भी कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बाल विवाह के मामले में दो वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में तेजी से कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने पिछले छह महीनों के आंकड़े पेश करते हुए इसे पिछली सरकारों की बड़ी विफलता करार दिया और इस सामाजिक कोढ़ के खिलाफ सबसे कठोर कदम उठाने की घोषणा की।
उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि जो लोग इस दायरे में आते हैं, उन्हें तुरंत कानून के शिकंजे में कसा जाए।
छह महीने में करीब 60 हजार नाबालिग बच्चियों का प्रसव
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 जून के बीच छह महीनों में करीब 60,000 संस्थागत प्रसव ऐसे हुए, जिनमें बच्चियों की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इनमें मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक 12,847 मामले दर्ज हुए।
दक्षिण 24 परगना 4,178 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। शुभेंदु ने दावा किया कि बाल विवाह और 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के प्रसव के मामले में बंगाल देश में सबसे आगे है।
उन्होंने कड़ी कार्रवाई की बात कहते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की किसी भी लड़की के गर्भवती होने पर पाक्सो एक्ट के तहत स्वतः संज्ञान लेकर रिपोर्ट दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने 19वीं सदी के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर का भी उल्लेख किया, जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ और महिला शिक्षा के समर्थन में अभियान चलाया था।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने बाल विवाह और नाबालिग बच्चियों के प्रसव से संबंधित आंकड़े केंद्र सरकार के साथ साझा नहीं किए थे।
