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बंगाल में दुर्गापूजा के स्टॉलों पर ‘शारदोत्सव’ लिखने पर रोक, मुख्यमंत्री ने कहा- दुर्गापूजा की लिखना होगा

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:28 PM (IST)

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गापूजा के दौरान पुस्तक स्टॉलों पर 'शारदोत्सव' के बजाय 'दुर्गापूजा' लिखने का निर्देश दिया है।

बंगाल में दुर्गापूजा के स्टॉलों पर ‘शारदोत्सव’ लिखने पर रोक। (पीटीआई)

बंगाल में दुर्गापूजा के स्टॉलों पर ‘शारदोत्सव’ लिखने पर रोक। (पीटीआई)

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने दुर्गापूजा स्टॉलों पर 'शारदोत्सव' लिखने पर आपत्ति जताई।

  2. पूजा समितियों को 'दुर्गापूजा' शब्द का उपयोग अनिवार्य करने का निर्देश।

  3. धार्मिक पहचान कम करने वाले स्टॉलों को अनुमति न देने की बात कही।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को विधानसभा में वामपंथी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए दुर्गापूजा के दौरान लगाए जाने वाले उनके पुस्तक स्टॉलों को लेकर सख्त संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक स्टॉलों पर दुर्गापूजा की जगह शारदोत्सव लिखे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने पूजा समितियों से कहा कि यदि माकपा या कोई अन्य वामपंथी संगठन दुर्गापूजा के दौरान पुस्तक स्टाल पर केवल ‘शारदोत्सव’ लिखता है और ‘दुर्गापूजा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करता तो ऐसे स्टाल को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गापूजा को ‘सार्वजनिक उत्सव’ के रूप में मनाया जाता है और इसके आयोजन में धार्मिक पहचान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान सभी समुदायों के लोगों को अपने धार्मिक विश्वास और परंपराओं का पालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने वामपंथी पुस्तक स्टॉलों के बैनर पर शादोत्सव की जगह दुर्गापूजा लिखने का आह्वान किया।

विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करती है।

मुस्लिम, बौद्ध, आदिवासी समेत सभी समुदायों के लोग स्वतंत्र रूप से अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित वामपंथी प्रोफेसर छद्म रूप में सनातन धर्म और हिंदू आस्था को निशाना बना रहे हैं।

बंगाल में पूजा स्टॉलों के बाहर मार्क्सवादी साहित्य के पुस्तक स्टॉल लगाने की रही है परंपरा

बंगाल में लंबे समय तक वाममोर्चा शासन के दौरान दुर्गापूजा के अवसर पर विभिन्न पूजा मंडपों के बाहर मार्क्सवादी साहित्य के पुस्तक स्टॉल लगाने की परंपरा रही थी।

इन स्टॉलों के माध्यम से वामपंथी संगठन साहित्य के साथ अपनी विचारधारा का प्रचार भी करते थे। 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद ऐसे स्टॉलों की संख्या काफी कम हो गई, हालांकि पार्क सर्कस सहित कुछ स्थानों पर यह परंपरा अब भी जारी है।

बताया जाता है कि 1954 में पार्क सर्कस में मुजफ्फर अहमद की पहल पर दुर्गापूजा के दौरान पुस्तक स्टॉल लगाने की शुरुआत हुई थी। आज भी वहां मार्क्सवादी साहित्य, पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकों के स्टॉल लगाए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार को पुस्तकें बेचने से आपत्ति नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि दुर्गापूजा को केवल ‘शारदोत्सव’ या सांस्कृतिक आयोजन बताकर उसकी धार्मिक पहचान को कमतर न किया जाए। पूजा समितियों को भी इसी आधार पर पुस्तक स्टॉलों को अनुमति देने का साफ संदेश दिया गया है।