बंगाल विधानसभा उपचुनाव: सत्ता में आने के बाद भाजपा की पहली बड़ी परीक्षा, नंदीग्राम पर सबकी नजर
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव भाजपा के लिए सत्ता में आने के बाद पहला चुनावी इम्तिहान है। इन चुनावों में जनता ...और पढ़ें

सत्ता में आने के बाद भाजपा की पहली बड़ी परीक्षा।
HighLights
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव भाजपा का पहला चुनावी टेस्ट।
ममता बनर्जी के आंदोलन से जुड़ी नंदीग्राम सीट पर सबकी नजर।
उपचुनाव से पहले नंदीग्राम थाने के प्रभारी बदले गए।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। नंदीग्राम व रेजीनगर में मंगलवार को होने वाला मतदान सिर्फ दो विधानसभा सीटों का उपचुनाव नहीं है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर सत्ता में आई भाजपा के लिए यह पहला चुनावी टेस्ट है। इन उपचुनावों में इसपर भी नजर रहेगी कि बिखरे हुए विपक्ष में कौन-सी पार्टी भाजपा के सामने मुख्य चुनौती बनकर उभरती है।
मई में सत्ता संभालने के बाद इन उपचुनावों से भाजपा सरकार को लेकर जनता के शुरुआती मूड का अंदाजा लगाने की भी कोशिश होगी। उधर, विपक्षी दल भी बिखरे राजनीतिक मैदान में अपनी-अपनी जगह बनाने की जुगत में लगे हैं। सत्तारूढ़ दल हो या विरोधी, सबकी नजर अल्पसंख्यक वोटरों के रुख पर टिकी है।
नंदीग्राम पर सबकी नजर
नंदीग्राम पर सियासी नजरें टिकना लाजिमी है। इस सीट का सियासी महत्व काफी पुराना और प्रतीकात्मक है। यही वह इलाका है, जहां ममता बनर्जी ने भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन किया था, जिसने 2011 में तृणमूल के सत्ता तक पहुंचने की राह तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
2021 में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर ममता बनर्जी को हरा दिया था। अब एक बार फिर नंदीग्राम में चुनावी मुकाबला है। यहां राजनीतिक तालमेल की भी परीक्षा होगी।
ममता बनर्जी का धड़ा कांग्रेस को समर्थन देकर विपक्षी एकजुटता साधने की कोशिश में है, वहीं भाजपा विधानसभा चुनाव में मिली अपनी बढ़त को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है।
उपचुनाव से पहले बदले गए नंदीग्राम थाने के प्रभारी
विधानसभा उपचुनाव से पहले नंदीग्राम थाने के प्रभारी अजय कुमार मिश्रा को हटा दिया गया है। उनकी जगह देवाशीष सरकार को लाया गया है। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। इस बदलाव को चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
