बंगाल: सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सातवें वेतन आयोग का लाभ, सैलरी में होगी बंपर बढ़ोतरी
बंगाल में सातवें वेतन आयोग की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिसमें विभागों से डेटा संग्रह कर वेतन संशोधन की सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगा बड़ा इजाफा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की प्रक्रिया अब उस चरण में पहुंच रही है, जहां वेतन संशोधन की तस्वीर विभागों से मिलने वाले आंकड़ों और कर्मचारी संगठनों की मांगों के आधार पर आकार लेगी। आयोग ने सभी सरकारी विभागों से कर्मचारियों के पद, सेवा संवर्ग और संख्या का ब्योरा मांगा है।
यह कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर मौजूदा वेतन ढांचे की समीक्षा और नए वेतन निर्धारण से जुड़ी सिफारिशें तैयार की जाएंगी। कर्मचारियों के लिए असली सवाल यही है कि नए वेतनमान से उनकी तनख्वाह और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों में कितना बदलाव होगा और इसका फायदा कब से मिलेगा।
राज्य सरकार ने 22 जुलाई को सातवें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को यथासंभव छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इस लिहाज से जनवरी 2027 तक सिफारिशें आने की संभावना है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी पहले चालू वित्त वर्ष के अंत तक संशोधित वेतन का लाभ देने की कोशिश करने की बात कही थी। हालांकि, इसके लिए आयोग की रिपोर्ट, सरकार की स्वीकृति और उसके बाद आवश्यक अधिसूचना जारी होना जरूरी होगा।
वेतन बढ़ोतरी का गणित तय करने की तैयारी
आयोग की चुनौती केवल कर्मचारियों के मूल वेतन में बढ़ोतरी की सिफारिश करना नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों और सेवा संवर्गों की वेतन संबंधी विसंगतियों को समझना भी है।
विभिन्न पदों के वेतनमान, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए विभागवार आंकड़े जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से आयोग के सदस्य सचिव देवी प्रसाद करनम ने 14 अक्टूबर को सभी विभागों के अधिकारियों को नोडल अधिकारियों के जरिए ऑनलाइन प्रश्नावली भरने का निर्देश दिया।
नए वेतन ढांचे में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका अहम होगी। इसी के आधार पर मौजूदा मूल वेतन को संशोधित वेतनमान में निर्धारित करने का तरीका तय किया जा सकता है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि और पेंशन संबंधी प्रावधान भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, इन मदों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
कर्मचारियों की अपेक्षाएं भी अलग-अलग हैं। कर्मचारी संगठन वेतन संशोधन के साथ महंगाई भत्ते के अंतर, वेतन विसंगतियों और सेवानिवृत्ति लाभों जैसे मुद्दे उठा सकते हैं। आयोग की सिफारिशों में इन मांगों को किस हद तक जगह मिलती है, यह उसकी समीक्षा और सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
मार्च तक लाभ देने की कोशिश, लेकिन तारीख पर निगाहें
आयोग ने कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी सुझाव देने का रास्ता खोला है। आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध व्यवस्था के तहत संगठनों और व्यक्तियों से ज्ञापन मांगे गए हैं। इसके लिए 31 अक्टूबर 2026 अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। इससे कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगें औपचारिक रूप से दर्ज कराने का अवसर मिला है।
राज्य सरकार की ओर से चालू वित्त वर्ष के अंत तक संशोधित वेतन का लाभ देने की कोशिश का संकेत पहले दिया जा चुका है। लेकिन जनवरी में आयोग की रिपोर्ट आने की स्थिति में उसके अध्ययन, सिफारिशों पर निर्णय और वेतन निर्धारण की प्रक्रिया के लिए समय भी चाहिए होगा। इसलिए मार्च 2027 तक लाभ मिलने की संभावना को सरकार की घोषित कोशिश के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित समयसीमा के रूप में।
फिलहाल कर्मचारियों के लिए दो तारीखें महत्वपूर्ण हैं। पहली, 31 अक्टूबर, जब ज्ञापन जमा करने की समयसीमा पूरी होगी। दूसरी, जनवरी 2027 के आसपास, जब आयोग की रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वेतन संशोधन का स्वरूप क्या होगा, किन भत्तों में बदलाव की सिफारिश की जाएगी और नए वेतनमान को किस तारीख से लागू करने का निर्णय लिया जाएगा।
