कोलकाता, जागरण संवाददाता। गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हाल में गंगा व इसकी सहायक नदियों में प्रतिमा विसर्जन पर रोक के बावजूद कोलकाता के पूजा आयोजकों पर इस फैसले का कोई असर नहीं दिखा। केंद्र की रोक के बावजूद मंगलवार को विजयादशमी के दिन से ही कोलकाता व आसपास के जिलों में हुगली नदी के किनारे विभिन्न गंगा घाटों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी रहा।

पुलिस प्रशासन द्वारा महानगर में प्रतिमा विसर्जन के लिए चिन्हित किए गए करीब 15 घाटों पर बिना कोई रोक-टोक के विसर्जन का सिलसिला बुधवार देर रात तक चलता रहा। हालांकि प्रशासन व स्थानीय निकायों द्वारा गंगा घाटों पर तैनात कर्मी प्रतिमा विसर्जन के साथ उसे तुरंत पानी से निकालने के काम में जरूर मुस्तैद दिखे। लेकिन, लोगों की आस्था के आगे केंद्र द्वारा गंगा में मूर्ति विसर्जन पर रोक का फैसला बेअसर दिखा। इधर, यहां के प्रमुख गंगा घाटों बाबूघाट, कदमतल्ला आदि में प्रतिमा विसर्जन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला आगामी 11 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

इधर, कोलकाता नगर निगम की ओर से विसर्जन के उपरांत घाटों की सफाई को लेकर भी बड़ी संख्या में निगम कर्मियों को लगाया गया है। गंगा में मूर्तियों के विसर्जन के साथ उसे क्रेन व अन्य माध्यमों से तुरंत बाहर निकाल लिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण ना फैले। कोलकाता के अलावा हावड़ा, व हुगली जिले में भी विभिन्न गंगा घाटों पर प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला जारी रहा। यहां भी केंद्र द्वारा लगाए गए रोक का कोई असर नहीं दिखा। हालांकि प्रशासन व नगर निगम व नगर पालिकाओं की ओर से विसर्जन के बाद प्रतिमा को तुरंत पानी से बाहर निकालने की व्यवस्था जरूर की गई। लेकिन, केंद्र के फैसले पर अमल नहीं दिखा।

उल्लेखनीय है कि करीब एक हफ्ते पहले केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश जारी कर बंगाल सहित 11 राज्यों में गंगा और इसकी सहायक नदियों में प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा दी थी। नए निर्देशों के मुताबिक अगर कोई भी इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो पर्यावरण हर्जाने के तौर पर उसे 50 हजार रुपये की रकम जुर्माने के तौर पर चुकानी होगी।

निर्देश के अनुसार, जैसे गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, दशहरा, दीपावली, छठ पूजा और सरस्वती पूजा के खत्म होने के सात दिनों के अंदर राज्य सरकारों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट का लिखित ब्योरा देना होगा। स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के नए नियमों को अमल में लाने का जिम्मा जिला मजिस्ट्रेटों को सौंपा गया है। नदियों और उनके तटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन को रोकने के लिए नदी तटों और घाटों की घेराबंदी करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन यह सब यहां सिर्फ कागजों में दिखा। 

Posted By: Preeti jha

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