क्रासर - बिना राज्य से चर्चा किए तैयार किया गया मसौदा

- आंदोलन नहीं, पहले पत्र लिख जताएंगे विरोध

- जबरन हिंदी थोपने के फिराक में है केंद्र जागरण संवाददाता, कोलकाता : केंद्र की शिक्षा नीति के मसौदे में बंगाल की अवहेलना की गई है। इसमें ईश्वरचंद्र विद्यासागर और राजा राममोहन राय का नाम तक नहीं हैं। पता नहीं यह कैसी शिक्षा नीति है? उक्त बातें राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने सोमवार को राज्य के शिक्षाविदों, शिक्षक संगठनों, शिक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया कर्मियों से मुखातिब होने के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से जो मसौदा भेजा गया है मैं उसी के आधार पर कह रहा हूं। इस मसौदे को तैयार करने से पहले केंद्र ने बंगाल के किसी शिक्षाविद् व शिक्षक संगठन से बात तक नहीं की। यह बंगाल की अवहेलना है और सोची समझी नीति के तहत हमें अपमानित करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षाविद् पवित्र सरकार, नरसिंह प्रसाद भादुड़ी व प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष व सचिव के साथ हुई बैठक के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस बैठक में स्कूल की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई है। इसके बाद कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों संग बैठक होगी। उन्होंने कहा 17 जुलाई को उच्च शिक्षा पर्षद की बैठक में वे इस मुद्दे को उठाएंगे। कई जगहों पर देखा गया है कि केंद्र सरकार बिना राज्य सरकार को बताए विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम बदलने संबंधित पत्र भेज रही है। ऐसे में कुछ लोग बिना जाने ही केंद्र की सूची को शामिल कर ले रहे हैं और कुछ अन्य है जो इस मसले को जानना चाहते हैं। लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि बिना राज्य को बताए पाठ्यक्रम व सूची में कोई फेरबदल नहीं होगा। स्नातकोत्तर के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में महाभारत व शकुंतला को पढ़ाने का जिक्र किया गया है। हालांकि केंद्र की शिक्षा नीति पर चर्चा के बाद उन्होंने महसूस किया है कि शिक्षाविद् व शिक्षक इस नए शिक्षा नीति से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम आंदोलन नहीं करेंगे, बल्कि पत्र लिख अपना विरोध जाहिर करेंगे। क्योंकि कलम का बल अभी भी खत्म नहीं हुआ है और रही बात एक्शन की तो हम उक्त मसले पर पहले मुख्यमंत्री से विस्तार से बात करेंगे और फिर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं शिक्षाविद् नरसिंह प्रसाद ने कहा कि हिंदी भाषा को जबरन थोपने की कोशिश की जा रही है। जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट को कम कर राज्य सरकारों पर अतिरिक्त दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। आगे उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर पर 5-3-3-4 की पद्धति सही हुई भी तो बुनियादी ढाचे के निर्माण की लागत कौन देगा?

Posted By: Jagran

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