राज्य ब्यूरो, कोलकाता। हाई कोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कोयला और गो तस्करी के मामले में विनय मिश्रा और रत्नेश वर्मा की अपील खारिज कर दी। जस्टिस घोष ने मामले की सुनवायी के बाद अपने फैसले को आरक्षित कर लिया था। उन्होंने अपना फैसला सुनाया। बचाव पक्ष की तरफ से इस पर स्टे लगाने की अपील की गई, लेकिन जस्टिस घोष ने इसे मानने से इनकार कर दिया।

जस्टिस घोष ने अपने फैसले में कहा है कि अपने संशोधनों के साथ दिल्ली पुलिस इस्टैबलिशमेंट एक्ट का पुनर्गठन इस इरादे से किया गया था कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत दायर मामलों की सीबीआई जांच कर सके। सीबीआई को दी गई सामान्य स्वीकृति अचानक कोई ठोस कारण बताए बगैर 2018 में 16 नवंबर को वापस ले ली गई थी। इस तरह केंद्र सरकार के भ्रष्ट कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की गई ताकि सीवीसी एक्ट 2003 के तहत दायर मामलों की जांच सीबीआई के अफसर नहीं कर सकें।

बहरहाल उन मामलों में जहां पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ जांच की बात है वहां मामले के तथ्यों के मुताबिक डीएसपीई एक्ट की धारा छह के तहत अनुमति लेने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस मामले में अफसरों और अभियुक्तों के खिलाफ जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं और उन्होंने जो आर्थिक क्षति पहुंचायी है उसमें संविधान के मुताबिक राज्य सरकार को दखल देने का कोई हक नहीं है।

इस मामले में सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में कहीं कोई अवैधानिकता नहीं है और सीबीआई अपनी जांच जारी रख सकती है। उनके खिलाफ आसनसोल के स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी। इसे रद्द करने की अपील करते हुए विनय मिश्रा और रत्नेश वर्मा की तरफ से एप्लिकेशन दायर किए गए थे। जस्टिस घोष ने विनय मिश्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि बेहतर होता अगर ‌पिटिशनर (विनय मिश्रा) ने कोर्ट के सामने एक पारदर्शी तस्वीर पेश की होती। उनके एडवोकेटों को भी उनकी मौजूदगी के बारे में जानकारी नहीं थी। वर्चु‍वल पूछताछ की शर्त कुछ ऐसी थी जैसे कोर्ट को आदेश दे रहे हो। यहां गौरतलब है कि विनय मिश्रा ‌इन दिनों प्रशांत महासागर के एक द्वीप भानुवातुर में हैं। 

Edited By: Priti Jha