कोलकाता, जागरण संवाददाता। Calcutta High Court. लगभग दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई के सीधे प्रसारण या इंटरनेट के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग के पक्ष में फैसला सुनाया था। हालांकि उसके बाद से भारत की न्याय प्रक्रिया में कभी ऐसा उदाहरण पेश नहीं किया गया। लेकिन अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर नजीर पेश करने जा रहा है। एक पारसी महिला द्वारा उसके नाती व नतिनी को पारसी धर्मस्थल (फायर टेंपल) में प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर मामले की पूरी सुनवाई का यूट्यूब पर लाइव प्रसारण होगा।

जानकारी के अनुसार, मामला पारसी एन मेहता व उनकी बेटी शनाया मेहता व्यास ने दायर किया है। शनाया का पति पारसी नहीं है, ऐसे में पारसी परंपरा के अनुसार उसे अग्नि मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं है। अधिवक्ता फिरोजी इदुलजी ने कहा कि पारसी परंपरा के अनुसार जाति से बाहर शादी करनेवालों को मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं होता। ऐसे में हम चाहते हैं कि इस मामले में पूरा पारसी समाज यह सुने और देखे कि कोर्ट इस मामले में क्या राय देता है। इसलिए इस मामले के लाइव प्रसारण की मांग रखी है।

गौरतलब है कि मामले में बचाव पक्ष स्वर्गीय इरवड धनजीभाई बेरामजी मेहता की जोरास्ट्रीयन अतश अदरम ट्र्स्ट है। इस ट्रस्ट का एक हिस्सेदार पारसी जोरास्ट्रीयन एसोसिएशन ऑफ कोलकाता ने भी मामले के लाइव प्रसारण की मांग की थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ ने आरंभिक सुनवाई में इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने दो जजों की पीठ में अपील की। बुधवार को न्यायाधीश संजीव बंद्योपाध्याय और न्यायाधीश कौशिक चंद की पीठ ने मामले की यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग का निर्देश दिया। फिलहाल मामले को एकल पीठ को लौटा दिया गया है और सुनवाई की तारीख बाद में मुकर्रर होना है।

पीठ ने कहा कि पूरी दुनिया इस मामले की सुनवाई देख और सुन सके, इसलिए इसकी लाइव स्ट्रीमिंग का आदेश दिया गया है। आदेश के अनुसार सुनवाई के मुख्य हिस्सों का प्रसारण होगा और इसका पूरा खर्च याचिकाकर्ता उठाएगा।

2018 में ही सुप्रीम कोर्ट कर चुका है स्पष्ट

26 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की बेंच ने न्याय प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सुनवाई के लाइव प्रसारण की मांग करते हुए दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इसके पक्ष में फैसला सुनाया था। अपने फैसले में उन्होंने कहा था कि जिस तरह से जीवाणुओं के नाश के लिए सूर्य की किरण जरूरी है, उसी तरह न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए लाइव प्रसारण जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इससे कानून के विद्यार्थियों के साथ आम लोग भी यह जान पाएंगे कि अदालतों में कैसे मामलों की सुनवाई होती है और किस तरह से सवाल-जवाब होता है।

हालांकि तब सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि किस तरह के मामलों की सुनवाई का सीधा प्रसारण होगा और किन मामलों का नहीं। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर अमल करते हुए संभवत: यह देश का पहला मामला होगी, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग कोलकाता हाई कोर्ट की ओर से की जाएगी।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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