विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बंगाल में 'महाकाल' भी नहीं बचा सके ममता को: 8 में से 5 जिलों में TMC का सूपड़ा साफ, लक्ष्मी भंडार योजना भी फेल

By Vipin RaiEdited By: Garima Singh
Published: Mon, 04 May 2026 07:56 PM (IST)

उत्तर बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जहां पिछली बार की तुलना में सीटें ...और पढ़ें

ममता बनर्जी, फाइल फोटो

ममता बनर्जी, फाइल फोटो

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

विपिन राय, सिलीगुड़ी। इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम ने दक्षिण बंगाल के साथ ही उत्तर बंगाल ने भी तृणमूल कांग्रेस को करारा झटका दिया है। पिछली बार तो तृणमूल कांग्रेस 54 सीटों में से 24 सीटें जीत भी सकी थी लेकिन इस बार यह आंकड़ा मात्र 14 रह गया है। आठ जिलों में से पांच जिलों में तृणमूल कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला।

ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी ने इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की कोशिश नहीं की थी। उन्होंने अपनी सरकार की विकास योजनाओं को भुनाने के साथ ही मुस्लिम तुष्टिकरण के ठप्पे को हटाने के लिए ‘साफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति अपनाई। चुनाव परिणाम से साफ है कि उनकी यह रणनीति और उनकी सरकार की भारी-भरकम कल्याण योजनाएं यहां पूरी तरह फेल हो गईं।

महाकाल भी नहीं बचा पाए ममता को 

सिलीगुड़ी में प्रस्तावित महाकाल महातीर्थ मंदिर समेत लक्ष्मी भंडार और युवाश्री जैसी योजनाएं भी मतदाताओं को लुभा नहीं सकीं। ‘जय श्री राम’ की गूंज ने सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया। आज चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद भी हर ओर जय श्री राम का नारा ही लग रहा है। दरअसल इसकी गूंज यहां पिछले एक साल में ज्यादा सुनाई देने लगी थी।

उसके बाद ही ममता बनर्जी ने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे का मुकाबला करने के लिए खुद को हिंदू नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। दीघा में जगन्नाथ मंदिर निर्माण, कोलकाता में दुर्गांगन और सिलीगुड़ी के चांदमुनी इलाके में 17 एकड़ जमीन पर 344 करोड़ रुपये की लागत से महाकाल मंदिर का शिलान्यास इसी रणनीति का हिस्सा था।

ममता बनर्जी ने खुद इस मंदिर का शिलान्यास किया था। इसका मकसद उत्तर बंगाल के हिंदू मतदाताओं को साधना था, खासकर जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग,कूचबिहार और कालिम्पोंग जिलों की 27 विधानसभा सीटों पर। लेकिन चुनाव परिणाम साफ बता रहे हैं कि उनका यह कार्ड पूरी तरह फ्लाप रहा। महाकाल बाबा भी चुनाव मैदान में ममता बनर्जी को नहीं बचा सके।

ममता सरकार की लोकप्रिय मानी जाने वाली लक्ष्मी भंडार योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये और अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। चुनाव से पहले शुरू की गई युवाश्री योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को 1500 रुपये मासिक देने का ऐलान किया गया था। रूपश्री योजना भी महिलाओं को आर्थिक सहयोग देती रही। लेकिन उत्तर बंगाल में इन योजनाओं का कोई खास असर नहीं दिखा।

रामनवमी के भव्य आयोजन से मिलने लगे संकेत

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल में रामनवमी के भव्य आयोजन शुरू हुए। जहां पहले जय श्री राम की गूंज सीमित थी, वह अब पूरे क्षेत्र में गूंजने लगी। गेरुआ रंग साफ नजर आने लगा। ममता बनर्जी को इस बदलाव का अहसास था, इसलिए उन्होंने महाकाल मंदिर का कार्ड खेला, लेकिन यह ‘बहुत कम और बहुत देर से’ साबित हुआ।

भाजपा ने घुसपैठ और अन्य मुद्दों को भी भुनाया

भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ, विकास, सांस्कृतिक पहचान और हिंदू अस्मिता जैसे मुद्दों को लगातार उठाया। तृणमूल कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के कटमनी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया गया। लक्ष्मी भंडार योजना और युवाश्री योजना की राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने का वादा भी काम कर गया।

इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम ने दक्षिण बंगाल के साथ ही उत्तर बंगाल ने भी तृणमूल कांग्रेस को करारा झटका दिया है। पिछली बार तो तृणमूल कांग्रेस 54 सीटों में से 24 सीटें जीत भी सकी थी लेकिन इस बार यह आंकड़ा मात्र 14 रह गया है। आठ जिलों में से पांच जिलों में तृणमूल कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला।

ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी ने इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की कोशिश नहीं की थी। उन्होंने अपनी सरकार की विकास योजनाओं को भुनाने के साथ ही मुस्लिम तुष्टिकरण के ठप्पे को हटाने के लिए ‘साफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति अपनाई। चुनाव परिणाम से साफ है कि उनकी यह रणनीति और उनकी सरकार की भारी-भरकम कल्याण योजनाएं यहां पूरी तरह फेल हो गईं। सिलीगुड़ी में प्रस्तावित महाकाल महातीर्थ मंदिर समेत लक्ष्मी भंडार और युवाश्री जैसी योजनाएं भी मतदाताओं को लुभा नहीं सकीं।

‘जय श्री राम’ की गूंज ने सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया। आज चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद भी हर ओर जय श्री राम का नारा ही लग रहा है। दरअसल इसकी गूंज यहां पिछले एक साल में ज्यादा सुनाई देने लगी थी। उसके बाद ही ममता बनर्जी ने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे का मुकाबला करने के लिए खुद को हिंदू नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। दीघा में जगन्नाथ मंदिर निर्माण, कोलकाता में दुर्गांगन और सिलीगुड़ी के चांदमुनी इलाके में 17 एकड़ जमीन पर 344 करोड़ रुपये की लागत से महाकाल मंदिर का शिलान्यास इसी रणनीति का हिस्सा था।

ममता बनर्जी ने खुद इस मंदिर का शिलान्यास किया था। इसका मकसद उत्तर बंगाल के हिंदू मतदाताओं को साधना था, खासकर जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग,कूचबिहार और कालिम्पोंग जिलों की 27 विधानसभा सीटों पर। लेकिन चुनाव परिणाम साफ बता रहे हैं कि उनका यह कार्ड पूरी तरह फ्लाप रहा। महाकाल बाबा भी चुनाव मैदान में ममता बनर्जी को नहीं बचा सके।

ममता सरकार की लोकप्रिय मानी जाने वाली लक्ष्मी भंडार योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये और अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। चुनाव से पहले शुरू की गई युवाश्री योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को 1500 रुपये मासिक देने का ऐलान किया गया था। रूपश्री योजना भी महिलाओं को आर्थिक सहयोग देती रही। लेकिन उत्तर बंगाल में इन योजनाओं का कोई खास असर नहीं दिखा।

रामनवमी के भव्य आयोजन से मिलने लगे संकेत

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल में रामनवमी के भव्य आयोजन शुरू हुए। जहां पहले जय श्री राम की गूंज सीमित थी, वह अब पूरे क्षेत्र में गूंजने लगी। गेरुआ रंग साफ नजर आने लगा। ममता बनर्जी को इस बदलाव का अहसास था, इसलिए उन्होंने महाकाल मंदिर का कार्ड खेला, लेकिन यह ‘बहुत कम और बहुत देर से’ साबित हुआ।

भाजपा ने घुसपैठ और अन्य मुद्दों को भी भुनाया

भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ, विकास, सांस्कृतिक पहचान और हिंदू अस्मिता जैसे मुद्दों को लगातार उठाया। तृणमूल कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के कटमनी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया गया। लक्ष्मी भंडार योजना और युवाश्री योजना की राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने का वादा भी काम कर गया।

यह भी पढ़ें- Bengal Election Result: बंगाल की इस सीट पर भाजपा की जीत तय, वोटों के अंतर से टीएमसी की हवा खराब

यह भी पढ़ें- बंगाल में BJP के लिए काम कर गया 'M' फैक्टर, बिहार के नेता की सियासी चाल ने ममता के साथ कर दिया 'खेला'