विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तृणमूल में जंग: TMC ऑफिस भी गंवा बैठीं ममता, ऋतब्रत गुट ने किया टेकओवर; ताला लगाकर ले गए चाबी

Published: Fri, 03 Jul 2026 08:05 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:06 AM (GMT+05:30)

बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट ने कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य कार्यालय पर कब्जा कर लिया है, जिसमें फिरहाद हकीम जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

News Article Hero Image

HighLights

  1. बागी ऋतब्रत गुट ने तृणमूल के मुख्य कार्यालय पर कब्जा किया।

  2. अरूप राय को नया पार्टी चेयरमैन घोषित किया गया।

  3. ममता खेमा पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत का आरोप लगा रहा है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से जारी राजनीतिक घमासान अब एक नए और बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर की रार अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पार्टी के भौतिक ठिकानों पर 'कब्जे' की शक्ल अख्तियार कर चुकी है।

शुक्रवार को कोलकाता के मेट्रोपालिटन स्थित तृणमूल के मुख्य कार्यालय पर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट ने अपना अधिकार जमा लिया। इस हाई-प्रोफाइल 'कब्जे' के दौरान उनके साथ फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, जावेद खान और अखरुज्जमां जैसे कद्दावर विधायकों का पूरा काफिला मौजूद था, जिसने ममता गुट को हिलाकर रख दिया है।

पार्टी कार्यालय की दीवार पर पार्टी के नए चेयरमैन के नाम वाला प्लेकार्ड लगाया

यह घटनाक्रम सिर्फ एक इमारत पर नियंत्रण का मामला नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी के 'कालीघाट गुट' के खिलाफ ऋतब्रत खेमे की सीधी जंग का एलान है। दिलचस्प बात यह है कि कार्यालय के भीतर ममता बनर्जी की तस्वीरों और कटआउट्स को छुआ तक नहीं गया है। ऋतब्रत गुट ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत साफ किया है कि वे 'दीदी' को अपना मार्गदर्शक (परामर्शदाता) मानते हैं, लेकिन वे ममता-अभिषेक की जोड़ी के बिना ही आगे बढ़ेंगे।

कार्यालय के बाहर टांगा गया एक नया प्लैकार्ड इस नई हकीकत की गवाही दे रहा है, जिस पर हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय का नाम पार्टी के नए चेयरमैन के रूप में चमक रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन और दिल्ली में चुनाव आयोग के पूर्ण पीठ से मुलाकात के तुरंत बाद उठाया गया यह कदम बेहद सुनियोजित है। ऋतब्रत खेमे का दावा है कि पार्टी के दो-तिहाई विधायक, पूर्व मंत्री, पार्षद और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं, इसलिए वही 'असली तृणमूल' हैं और इस दफ्तर से उनकी भावनाएं जुड़ी हैं।

इस कब्जे के लिए उन्होंने भवन के मालिक मंतू साहा से सीधे बातचीत कर किराए का मामला सुलझाया है—वही मंतू साहा जिनकी कंपनी 'माडर्न डेकोरेटिंग' कभी 21 जुलाई की ऐतिहासिक रैलियों के मंच सजाया करती थी और जिन्होंने चुनाव बाद तृणमूल को इमारत खाली करने का अल्टीमेटम दिया था।

पुलिस और सरकार की मिलीभगत से हो रहा है यह सबः कुणाल

दूसरी तरफ, कालीघाट स्थित ममता खेमे में इस घटना से भारी आक्रोश है। ममता खेमे के विधायक कुणाल घोष ने सरकार और पुलिस पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह कब्जा पूरी तरह राज्य प्रशासन की मिलीभगत से हुआ है और एक निष्कासित नेता भाजपा की 'बी टीम' बनकर यह गंदा खेल खेल रहा है।

21 जुलाई की शहीद दिवस रैली के आयोजन को लेकर विक्टोरिया हाउस के सामने दोनों गुटों के बीच पहले ही शह-मात का खेल जारी था, जिसे पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी। अब इस नए कार्यालय विवाद ने बंगाल की राजनीति को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड की असली लड़ाई का फैसला अब सड़कों से लेकर कोर्ट और चुनाव आयोग के गलियारों तक होना तय है।