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'ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात...', बागी गुट के विलय की घोषणा के बाद TMC का पलटवार

Published: Mon, 15 Jun 2026 08:09 AM (GMT+05:30)

पश्चिम बंगाल में TMC के बागी गुट ने दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय ...और पढ़ें

ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात का आरोप (फाइल फोटो)

ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात का आरोप (फाइल फोटो)

HighLights

  1. TMC बागी गुट ने दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए दूसरे पार्टी में विलय की घोषणा की

  2. तृणमूल ने इसे ममता बनर्जी के साथ बड़ा विश्वासघात बताया

डिजिटल डेस्क, कोलकाता।पश्चिम बंगाल में एक बड़े सियासी उलटफेर के तहत TMC के बागी गुट ने दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय की घोषणा कर दी है। इस विद्रोही गुट ने खुद को NDA का हिस्सा बताते हुए भविष्य में तृणमूल के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोकने की बात कही है।

वहीं, इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने इसे ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात और धोखा करार दिया है।

मदन मित्रा ने कहा कि विद्रोहियों ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था और कहा था कि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं। अब वे अपने वादे से मुकर गए हैं। यह धोखा है।

बागी विधायकों के पास दो-तिहाई बहुमत

जब पत्रकारों ने मदन मित्रा से पूछा गया कि क्या टीएमसी इस मामले को अदालत में ले जाएगी, तो उन्होंने कहा कि यह ममता बनर्जी पर निर्भर करता है। जब उन्हें बताया गया कि बागी विधायकों के पास दो-तिहाई बहुमत है, तो मित्रा ने कहा कि अलग पार्टी बनाने के लिए यह संख्या बहुत कम है। अभी बहुत सारी प्रक्रियाएं चलनी बाकी हैं। यह तो बस शुरुआत है।

उन्होंने मजाक के बहाने विद्रोहियों पर तंज भी कस दिया। जब किसी ने बताया कि विद्रोहियों ने कोई नई पार्टी नहीं बनाई है, तो मित्रा ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया था। उस तरफ सुभाष बोस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। हालांकि, विद्रोहियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे तृणमूल के नाम और चुनाव चिन्ह पर कब्जा करने का प्रयास करेंगे।

संकट से जूझ रही टीएमसी

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद टीएमसी राजनीतिक और कानूनी पेचीदगियों से जूझ रही है। रविवार का दिन उसके लिए बेहद खास रहा। सुबह, उनके भतीजे और पार्टी के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी से कथित जाली हस्ताक्षर के मामले में राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने पूछताछ की।

वहीं, स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर विद्रोही गुट से निपटने का सवाल उठाया। शाम तक, विद्रोहियों ने घोषणा की कि वे दो-तिहाई बहुमत वाली एक कम ज्ञात पार्टी -नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में शामिल हो रहे हैं, जिससे वे दलबदल विरोधी कानून से मुक्त हो जाएंगे।

किसके पास जाएगा पार्टी का नाम और सिंबल

बागी दल में शामिल होने वाले आखिरी सांसदों में से एक और पार्टी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के (पूर्व) करीबी सहयोगी सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, "जब आप पार्टी के दो-तिहाई बहुमत के साथ अलग होते हैं, तो पहले ही दिन उस पार्टी के नाम पर दावा नहीं ठोक सकते। जुलाई में हम 'तृणमूल' नाम और प्रतीक की मांग करेंगे, क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। इसके बाद अदालत ही अंतिम फैसला करेगी।"

वहीं, आज शाम बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने साफ किया, "हमारे पास दो-तिहाई बहुमत मौजूद है। हम एनडीए (NDA) का हिस्सा बनेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे।"

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