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ममता को हटाकर अरूप रॉय बने टीएमसी के नए चेयरमैन, अभिषेक भी महासचिव पद से बाहर

Published: Mon, 22 Jun 2026 07:22 PM (IST)

बागी तृणमूल गुट ने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया है, जिसमें अरूप राय को चेयरमैन और ऋतब्रत बनर्जी को महासचिव बनाया गया है।

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HighLights

  1. बागी तृणमूल गुट ने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाई

  2. अरूप राय चेयरमैन, ममता बनर्जी पद से हटाई गईं

  3. अभिषेक बनर्जी भी राष्ट्रीय महासचिव पद से बाहर

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद पार्टी में जारी बगावत सोमवार को नए मोड़ पर पहुंच गई। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने दावा किया कि उसने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित कर दी है।

इस नई समिति में हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय को चेयरमैन बनाया गया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस पद से हटा दिया गया है। वहीं, अभिषेक बनर्जी को भी राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाकर नई नियुक्तियों की घोषणा की गई।

बागी तृणमूल गुट ने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाई

बजट सत्र समाप्त होने के बाद न्यू टाउन के एक होटल में बागी विधायकों की बैठक हुई। गुट का दावा है कि इसमें 60 विधायक और कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षद शामिल हुए। बैठक में 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की घोषणा की गई।

बागी नेताओं ने तृणमूल के संविधान की धारा-20 का हवाला देते हुए कहा कि हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन 2022 के बाद ऐसी कोई बैठक नहीं हुई। इसी आधार पर पुरानी कार्यसमिति को भंग कर नई समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

बागी गुट का दावा-'असल तृणमूल' वही हैं 

नई समिति में पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, विधायक फिरहाद हकीम और रथीन घोष को उपाध्यक्ष बनाया गया है। महासचिव के रूप में ऋतब्रत बनर्जी के साथ जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यासमिन को जिम्मेदारी दी गई है।

अखरुज्जमान को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सोमवार की बैठक में बागी गुट ने दावा किया कि वही 'असल तृणमूल' है। बैठक में चंद्रिमा भट्टाचार्य के पुत्र और पूर्व पार्षद सौरभ बसु की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही।

हालांकि, ममता खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार बागी गुट को इस तरह की समिति बनाने या नेतृत्व बदलने का कोई अधिकार नहीं है।