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बुलडोजर एक्शन पर TMC का धरना, 46 विधायक नहीं पहुंचे; बढ़ी ममता की टेंशन

Published: Wed, 20 May 2026 04:24 PM (IST)Updated: Wed, 20 May 2026 04:25 PM (IST)

विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस का पहला बड़ा धरना प्रदर्शन विफल रहा, जिसमें 80 में से 46 ...और पढ़ें

बंगाल विधानसभा परिसर में TMC का धरना प्रदर्शन।  (सोशल मीडिया)

बंगाल विधानसभा परिसर में TMC का धरना प्रदर्शन। (सोशल मीडिया)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार के पश्चात बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। चुनाव के बाद राज्य की नई भाजपा सरकार के खिलाफ बंगाल विधानसभा परिसर में तृणमूल द्वारा बुधवार को आयोजित पहला बड़ा धरना प्रदर्शन ही सवालों के घेरे में आ गया।

चुनाव नतीजों के बाद राज्यभर में कथित राजनीतिक हिंसा, नई सरकार की बुलडोजर कारवाई और रेलवे भूमि एवं स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों से फेरीवालों को कथित तौर पर जबरन हटाए जाने की कार्रवाई के खिलाफ विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित पार्टी के धरना-प्रदर्शन से तृणमूल के नवनिर्वाचित 80 में 46 विधायक गैरहाजिर रहे।

आधा घंटे में खत्म हुआ धरना

केवल 34 विधायक ही मौजूद रहे। आधे से अधिक विधायकों की गैरहाजिरी ने पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधे से अधिक विधायकों की अनुपस्थिति के बीच तृणमूल का धरना महज आधे घंटे में ही समाप्त हो गया।

धरना प्रदर्शन में तृणमूल विधायक दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, पूर्व मंत्री व कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम और प्रवक्ता कुणाल घोष सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। लेकिन धरना शुरू होते ही साफ हो गया कि पार्टी के बड़ी संख्या में विधायक नदारद हैं।

शुरुआत में केवल 31 विधायक पहुंचे थे, बाद में तीन और विधायक शामिल हुए, जिससे कुल संख्या 34 तक पहुंची। विपक्ष में बैठने के बाद तृणमूल के पहले बड़े प्रदर्शन में इतनी कम उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। मालूम हो कि एक दिन पहले तृणमूल सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित पार्टी विधायकों की बैठक से भी 15 विधायक गैरहाजिर रहे थे।

विधायकों की अनुपस्थिति पर कुणाल घोष ने दी सफाई

इधर, विधानसभा में धरना स्थल पर ममता बनर्जी जिंदाबाद और तृणमूल जिंदाबाद के नारे तो लगे, लेकिन एक बार भी अभिषेक बनर्जी जिंदाबाद का नारा सुनाई नहीं दिया। इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों और संभावित खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर बाद में कुणाल घोष ने सफाई दी।

उन्होंने कहा कि चुनाव बाद कई इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं, इसलिए अनेक विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति संभालने में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी की फैक्ट फाइंडिंग टीमें विभिन्न जिलों के दौरे पर हैं, जिसके कारण कई विधायक समय पर कोलकाता नहीं पहुंच सके।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल यही वजह पूरी तस्वीर नहीं बताती। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल नेताओं के खिलाफ कथित वसूली, सिंडिकेट राज, धमकी और आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में पुलिस कार्रवाई तेज हुई है। हाल के दिनों में कई नेताओं की गिरफ्तारी और पूछताछ ने पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है।

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