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संसदीय समितियों में फेरबदल से TMC की बढ़ी मुश्किलें, काकोली घोष की नियुक्ति पर अभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल

Published: Sun, 04 Oct 2026 10:43 PM (IST)

संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद तृणमूल कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है, जिसमें पार्टी ने दो महत्वपूर्ण अध्यक्ष पद गंवा दिए हैं।

अभिषेक बनर्जी ने काकोली दस्तीदार की नियुक्ति पर आपत्ति जताई

अभिषेक बनर्जी ने काकोली दस्तीदार की नियुक्ति पर आपत्ति जताई

HighLights

  1. तृणमूल ने संसदीय स्थायी समितियों के दो अध्यक्ष पद खो दिए

  2. अभिषेक बनर्जी ने काकोली दस्तीदार की नियुक्ति पर आपत्ति जताई

  3. दस्तीदार के खिलाफ दलबदल विरोधी याचिका लंबित होने का हवाला दिया

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर घमासान तेज हो गया है। पार्टी ने दो महत्वपूर्ण समितियों के अध्यक्ष पद गंवा दिए हैं।

वहीं, रासायनिक एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष पद पर काकोली घोष दस्तीदार की नियुक्ति को लेकर ममता तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति जताई है।

अभिषेक ने सवाल उठाया है कि दस्तीदार को किस दल के सांसद के तौर पर समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत अयोग्यता की याचिका अभी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है।

ऐसे में मामले के निपटारे से पहले उन्हें संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया जाना उचित नहीं है। अभिषेक ने नियुक्ति वापस लेने और तृणमूल के नामित सदस्य को फिर से अध्यक्ष बनाने की मांग की है।

दरअसल, संसदीय स्थायी समितियों के हालिया पुनर्गठन में तृणमूल कांग्रेस के दोनों अध्यक्ष पद चले गए हैं। वाणिज्य संबंधी समिति की अध्यक्ष द्रौपदी सेन की जगह भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को अध्यक्ष बनाया गया है।

वहीं, रासायनिक एवं उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता पहले तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद के पास थी, जिसकी जिम्मेदारी अब दस्तीदार को दी गई है।

अभिषेक ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि लोकसभा के डिजिटल संसदीय अभिलेख में अब भी 28 सांसदों को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है। इसके बावजूद संबंधित सांसदों को दूसरे दल से जुड़ा हुआ मानकर समिति की अध्यक्षता देना सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने पूछा है कि यदि यह पद तृणमूल के लिए निर्धारित था तो पार्टी के नामित सदस्य को हटाकर दूसरे सांसद को क्यों नियुक्त किया गया। वहीं, यदि यह पद किसी दूसरे दल के लिए निर्धारित किया गया है तो उस दल की मान्यता और संबंधित सांसद की स्थिति को किस आधार पर स्वीकार किया गया।

अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि बागी सांसदों के दल संबंधी विवाद का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। ऐसे में अयोग्यता संबंधी मामलों के लंबित रहते उन्हें संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले पर लिखित जवाब भी मांगा है।इधर, राज्यसभा में ममता तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी समिति पुनर्गठन को लेकर सवाल उठाया है।

उनका आरोप है कि वर्ष 2026-27 के लिए राज्यसभा के अधीन आने वाली आठ विभाग संबंधी स्थायी समितियों में से किसी एक की भी अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस को नहीं दी गई। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों में तृणमूल के पास जो अध्यक्ष पद थे, इस बार उन्हें भी वापस ले लिया गया है।