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बागी, विद्रोह और मेयर का इस्तीफा...: ममता बनर्जी को दो दिन में तीन झटके, टीएमसी में बगावत की Inside Story

Published: Thu, 04 Jun 2026 06:04 PM (IST)Updated: Thu, 04 Jun 2026 06:49 PM (IST)

बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

ममता बनर्जी

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हाथों करारी हार के कुछ दिनों बाद, तृणमूल कांग्रेस अपने विधायी रैंकों में विद्रोह से जूझ रही है।इस बीच बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने निगमायुक्त को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। बंगाल की सत्ता से उखड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस को यह एक और झटका है। मालूम हो कि बिधाननगर नगर निगम में वर्तमान में तृणमूल का बोर्ड है।

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा- मैंने व्यक्तिगत कारणों से यह निर्णय लिया है। मुझे अपने लिए कुछ समय चाहिए। मैं पार्षद के रूप में काम करती रहूंगी। बिधाननगर के लोगों से मुझे जो प्यार मिला है, उसके लिए मैं हमेशा उनकी आभारी रहूंगी।

क्या है इस्तीफे की वजह?

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी या किसी व्यक्ति से कोई नाराजगी है तो उन्होंने इससे इनकार किया। कृष्णा को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबियों में गिना जाता है। वह पिछले 16 वर्षों से बिधाननगर नगर निगम से जुड़ी हैं। इस दौरान उन्होंने बोरो चेयरमैन और मेयर जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली।

TMC पर संकट

तृणमूल इस समय विकट राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष, कई नेताओं के इस्तीफे, भ्रष्टाचार व वसूली के आरोपों में गिरफ्तारियां तथा संगठनात्मक विवादों के बीच कृष्णा चक्रवर्ती का इस्तीफा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई है।

बुधवार को टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया कि कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। हालांकि हकीम ने अभी तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है।

कुणाल घोष ने मीडिया से कहा, 'फिरहाद हकीम ने कई बार पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने मेयर पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। उनका कहना था कि नगर निगम लगभग निष्क्रिय हो चुका है। वह सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ना चाहते हैं। ममता बनर्जी ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन बाद में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उन्हें इस्तीफा देने की अनुमति दे दी गई।'

बागियों को मिली मान्यता 

इससे पहले स्पीकर द्वारा टीएमसी के 58 बागी विधायकों को प्रमुख विपक्षी दल के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी को करारा झटका लगा है। अब तृणमूल कांग्रेस अपनी शहरी राजनीतिक संरचना में नई चुनौती का सामना कर रही है, क्योंकि प्रमुख महापौर पदों पर बैठे उसके कई वरिष्ठ नेताओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

बुधवार को स्पीकर रथिंद्र नाथ बोस ने विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 58 विद्रोही विधायकों को आधिकारिक रूप से प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा दे दिया। इन बागी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व पर तानाशाही का आरोप लगाया है और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की भूमिका को खुलकर चुनौती दी है।

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