बंगाल में मांसाहार पर सियासत, धीरेंद्र शास्त्री की सात्विक अपील के बाद शुभेंदु ने ऐसे साधा संतुलन
बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री की दुर्गापूजा में मांसाहार से परहेज की अपील पर विवाद छिड़ गया। जिसके बाद CM शुभेंदु ने 'मछली भोग' ग्रहण करके मामले को संतुलित किया।
-1789494608533_m.webp)
शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण किया
HighLights
धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गापूजा में मांसाहार से परहेज की अपील की
शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण किया
मुख्यमंत्री ने धार्मिक आस्था और बंगाली परंपरा में संतुलन साधा
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। बंगाल की राजनीति में मछली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की बंगाली हिंदुओं से दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करने की अपील के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल में कालीघाट मंदिर में मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
शुभेंदु ने कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण किया
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी संत या धार्मिक नेता को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन उसे मानना या न मानना लोगों का व्यक्तिगत निर्णय है। कौशिकी अमावस्या के अवसर पर पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री कालीघाट मंदिर पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद मंदिर के पुजारियों ने उन्हें वही भोग दिया जो मां को दोपहर में अर्पित किया गया था।
शुभेंदु ने बताया कि भोग में मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव शामिल था, जिसे उन्होंने ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा के दौरान वह सात्त्विक भोजन करते हैं और कार्तिक महीने में भी सात्त्विक आहार लेते हैं। लेकिन बंगाली होने के नाते मां काली को चढ़ाया गया मछली का भोग और बकरे की बलि का प्रसाद भी स्वीकार करते हैं।
लिलुआ से कालीघाट तक जारी रही राजनीतिक बहस
विवाद की शुरुआत चार सितंबर को हावड़ा के लिलुआ वर्कशाप मैदान में आयोजित हनुमंत कथा कार्यक्रम से हुई थी। वहां शुभेंदु अधिकारी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ मंच साझा किया था।
इसी दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गापूजा के दौरान बंगाली हिंदुओं से मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी। उनकी इस टिप्पणी के बाद बंगाल में राजनीतिक बहस तेज हो गई और भाजपा की प्रदेश इकाई को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
दिलचस्प यह है कि शास्त्री के साथ मंच साझा करने के कुछ ही दिनों बाद शुभेंदु ने कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण किया। इसके जरिए मुख्यमंत्री ने धार्मिक आस्था और बंगाली खान-पान की परंपरा के बीच संतुलन साधने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं की राय का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन भोजन को लेकर अंतिम फैसला व्यक्ति का अपना होता है।
