'सुमित राय ने अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर काम करने की बात स्वीकारी', बंगाल जमीन घोटाले में CID का खुलासा
पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी जमीन घोटाले में अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय ने उनके निर्देश पर काम करने की बात स्वीकार की है।

बंगाल जमीन घोटाले में CID का खुलासा।
HighLights
सुमित राय ने अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर काम करना स्वीकारा।
टीएमसीपी खाते में 7 करोड़ रुपये जमा करने की बात कबूली।
सीआईडी ने शालबनी जमीन घोटाले में बड़े नेटवर्क का दावा किया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा और बिक्री के मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय से पूछताछ में सीआईडी ने कई अहम जानकारी मिलने का दावा किया है। जांच एजेंसी ने अदालत में बताया कि पूछताछ के दौरान सुमित का बयान और स्वीकारोक्ति दर्ज की गई है।
सुमित ने अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर काम करने की बात स्वीकार की है। उसने कहा कि अभिषेक के निर्देश पर टीएमसीपी के खाते में सात करोड़ रुपये जमा किए थे।
सुमित को शालबनी जमीन घोटाला मामले में सितंबर में गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद सीआईडी ने उन्हें अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद मेदिनीपुर अदालत ने उन्हें सीआईडी हिरासत में भेजा।
सीआईडी ने अदालत में दावा किया कि सुमित से पूछताछ में एक बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है और उनके बयान को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 180 के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि आगे की जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
जमीन सौदों और धन के स्रोत की जांच
इस मामले में पूर्व तृणमूल विधायक सुजय हाजरा समेत कई लोगों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। सीआईडी का आरोप है कि शालबनी में सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे निजी संपत्ति के रूप में बेचने का काम किया गया। जांच में सुमित से जुड़े बैंक खातों में बड़े लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
सीआईडी ने सुमित का मोबाइल फोन भी जब्त किया है और मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपितों के साथ उनका आमना-सामना कराकर पूछताछ की गई है। अदालत ने सुमित को 24 सितंबर तक पांच दिन की सीआईडी हिरासत में रखने का आदेश दिया है। जांच एजेंसी अब कथित लेनदेन के स्रोत और पूरे नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
