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'दुर्गा पूजा को धर्म विशेष से जोड़ना बंगाल की संस्कृति के खिलाफ', टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने सीएम शुभेंदु पर साधा निशाना

Published: Thu, 22 Oct 2026 08:51 PM (IST)

तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने मुख्यमंत्री के दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर सनातन धर्म अनुयायियों को ही अनुमति देने वाले बयान ...और पढ़ें

सौगत रॉय ने शुभेंदु अधिकारी के बयान पर जताई आपत्ति (फाइल फोटो)

सौगत रॉय ने शुभेंदु अधिकारी के बयान पर जताई आपत्ति (फाइल फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हुगली नदी और अन्य घाटों पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म के अनुयायियों को ही प्रतिमा छूने की अनुमति होगी।

रॉय ने मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा सभी का उत्सव है। इसमें हिंदुत्व लाना और हिंदू ध्रुवीकरण का प्रयास करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा को किसी धर्म विशेष के चश्मे से देखना बंगाल की संस्कृति के खिलाफ है।

दमदम से वरिष्ठ तृणमूल सांसद रॉय ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हुगली नदी और अन्य घाटों पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म के अनुयायियों को प्रतिमा छूने की अनुमति देने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान से वह स्तब्ध हैं। इससे खराब बयान मैंने कभी नहीं सुना। पूजा समिति प्रतिमा कैसे उठाएगी और कब विसर्जन करेगी, यह उसका विषय है। इसमें राजनीति कहां से आ गई?

उन्होंने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर भी पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे पूजा समितियों में भाजपा का हस्तक्षेप एक कारण रहा। तृणमूल सांसद ने कहा कि वह 60 वर्षों से अधिक समय से कोलकाता में रह रहे हैं, लेकिन दुर्गा पूजा के दौरान ऐसी घटना पहले कभी नहीं देखी।

उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर 19 लोगों की मौत होना असामान्य और बेहद दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हादसे से पुलिस-प्रशासन की विफलता उजागर हुई है और पूजा समितियों में भाजपा के हस्तक्षेप से अव्यवस्था पैदा हुई।

हामिद अंसारी के बयान का समर्थन

वहीं, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के देश में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए सौगत रॉय ने कहा कि अंसारी सम्मानित नेता रहे हैं और उनकी बात पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, विरोध-प्रदर्शन देश के भीतर उठ रही आवाज हैं, न कि बाहर से पैदा हुई स्थिति।