- केंद्रीय मंत्री ने पूर्वी राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों व अधिकारियों संग की बैठक

- तीस्ता जल बंटावारे पर बातचीत बहुत आगे बढ़ने की कही बात

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को कहा कि अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के हल के लिए प्रस्तावित एकल स्थाई न्यायाधिकरण के गठन से विवादों के निपटारे में काफी तेजी आएगी। कोलकाता में पांच पूर्वी राज्यों- पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के संबंधित विभागों के मंत्रियों व अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पूरे देश में सिंचाई व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने व सभी नदी जल विवादों के त्वरित हल के लिए केंद्र सरकार ने एक ही न्यायाधिकरण गठित करने का फैसला किया है। वर्तमान में कावेरी, कृष्णा, नर्मदा व अन्य नदियों के विवाद के हल के लिए अलग-अलग न्यायाधिकरण हैं जबकि महानदी जल विवाद के लिए न्यायाधिकरण गठित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, इतने सारे न्यायाधिकरण की बजाय एकल स्थाई राष्ट्रीय न्यायाधिकरण का प्रस्ताव किया गया है और इससे संबंधित संशोधन विधेयक-2017 को पहले ही लोकसभा में पेश किया जा चुका है।

उन्होंने कहा, एकल न्यायाधिकरण से राज्यों को भी लाभ होगा और सभी हितों का ध्यान रखते हुए इसका प्रस्ताव किया गया है। मंत्री ने कहा, जल विवादों के हल में ना सिर्फ राज्यों की बल्कि केंद्र की भी रूचि है क्योंकि पानी एक राष्ट्रीय संपत्ति है।

बैठक में उन्होंने जल विवाद सहित पूर्वी राज्यों को धन जारी करने से संबंधित लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

वहीं, बांग्लादेश के साथ बहुप्रतीक्षित तीस्ता जल बंटावारे के संबंध में कहा कि इस मामले में दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और इस बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पहले ही संसद में बयान दे चुकी है। दरअसल, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तीस्ता समझौते का लंबे अरसे से विरोध करती आ रही है और उन्होंने कहा था कि इससे राज्य का हित प्रभावित होगा।

इस दौरान राज्य के सिंचाई मंत्री राजीव बनर्जी ने कहा कि सिक्किम में पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण के चलते तीस्ता का जल स्तर पहले ही कम हो चुका है।

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बंगाल सरकार ने तेनुघाट डैम पर संयुक्त नियंत्रण की मांग की

केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में राज्य के सिंचाई मंत्री राजीव बनर्जी ने झारखंड में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के अंतर्गत संचालित तेनुघाट डैम के संयुक्त नियंत्रण की मांग की। उन्होंने कहा, बाढ़ के मौसम में डैम से पानी छोड़े जाने से बंगाल को भारी नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए इसपर केंद्र व राज्य का संयुक्त नियंत्रण होना चाहिए ताकि नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने इस दौरान जल प्रबंधन के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि के आवंटन में देरी का मुद्दा भी उठाया।

Posted By: Jagran