सिलीगुड़ी में 17 लाख में सरकारी जमीन की लीज, अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर से खुला खेल
सिलीगुड़ी में सरकारी जमीन की लीज दिलाने के नाम पर 17 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें अधिकारियों ...और पढ़ें

यह फोटो एआई से बनाई गई है।
HighLights
सरकारी जमीन लीज के नाम पर 17 लाख का फर्जीवाड़ा।
जिलाधिकारी और भूमि विभाग के अधिकारियों के हस्ताक्षर जाली बनाए गए।
बागडोगरा के व्यापारी की शिकायत पर दो आरोपी गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। सरकारी जमीन की लीज दिलाने के नाम पर अफसरों का हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिलाधिकारी और भूमि व भूमि सुधार विभाग के अधिकारी के हस्ताक्षर की नकल उतारकर सरकारी जमीन के लीज का फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया।
इसके एवज में बागडोगरा के एक व्यापारी से कथित तौर पर 17 लाख रुपये भी ले लिए गए। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद व्यापारी की शिकायत पर नक्सलबाड़ी थाना पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान गौतम दत्ता और शुभम घोष के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, गौतम नक्सलबाड़ी ग्रामीण अस्पताल में ग्रुप-सी कर्मचारी है, जबकि शुभम चाय की दुकान चलाता है। दोनों को सोमवार को सिलीगुड़ी महकमा अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने पूछताछ के लिए दोनों की रिमांड मांगी है।
आरोप है कि बागडोगरा के व्यापारी को सरकारी जमीन लीज पर दिलाने का भरोसा देकर दोनों ने उससे 17 लाख रुपये लिए। इसके बाद जिलाधिकारी और भूमि व भूमि सुधार विभाग के अधिकारी के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज तैयार कर व्यापारी को दिए गए।
दस्तावेज लेकर व्यापारी जमीन का कब्जा लेने के लिए भूमि व भूमि सुधार कार्यालय पहुंचा। दस्तावेज पर अंकित हसताक्षर देख विभागीय अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद व्यापारी ने नक्सलबाड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले के सामने आते ही जिला प्रशासन में भी खलबली मच गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में दोनों आरोपितों की भूमिका कितनी थी और कहीं इस खेल में विभाग के किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं थी। पुलिस दस्तावेज, रकम के लेन-देन और सरकारी जमीन से जुड़े रिकार्ड की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भी जिलाधिकारी के हस्ताक्षर का फर्जीवाड़ा कर सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट के स्टालों के मालिकाना हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया था। मामला संज्ञान में आने के बाद तत्कालीन जिला शासक ने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। अब एक बार फिर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर के कथित फर्जी इस्तेमाल का मामला सामने आने से प्रशासनिक दस्तावेजों की सुरक्षा और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
