कार्निवाल पर ब्रेक, बंगाल में प्रतिमा विसर्जन में बदला सत्ता का रंग
सिलीगुड़ी में इस बार दुर्गा पूजा कार्निवाल नहीं हुआ, जिससे प्रतिमा विसर्जन सीधे लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट पर हुआ।

प्रतिमा विसर्जन में बदला सत्ता का रंग।
HighLights
सिलीगुड़ी में इस बार दुर्गा पूजा कार्निवाल रद्द हुआ।
विसर्जन मंच पर भाजपा नेताओं की प्रमुख उपस्थिति दिखी।
प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए पहली बार रैंप सिस्टम उपयोग हुआ।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के दौर में दुर्गा पूजा विसर्जन को भव्य रूप देने के लिए आयोजित होने वाला दुर्गा पूजा कार्निवाल इस बार सिलीगुड़ी में भी नहीं हुआ। इसका असर विसर्जन के आयोजन पर भी देखने को मिला। लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट पर इस बार कार्निवाल की जगह प्रत्यक्ष विसर्जन पर जोर रहा। पूजा कमेटियों ने भी अतिरिक्त तैयारी, खर्च और मेहनत से राहत महसूस की।
वहीं, विसर्जन के लिए तैयार मंच पर इस बार तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बजाय भाजपा नेताओं और मंत्रियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने हाथ में माइक लेकर विसर्जन की कमान संभाली।
इस बीच, पहली बार रैंप सिस्टम के जरिए प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, जिससे प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश हुई। महानंदा नदी के किनारे स्थित लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट पर बुधवार से प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई। बुधवार को 286, गुरुवार को 33 और शुक्रवार शाम तक सात प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस तरह तीन दिनों में कुल 326 प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।
बुधवार सुबह शुरू हुई प्रक्रिया गुरुवार तड़के पांच बजे तक जारी रही। विसर्जन के दौरान मंत्री शंकर घोष की मौजूदगी में पुलिस कमिश्नर से लेकर नगर निगम के आयुक्त तक ने व्यवस्थाओं की निगरानी की। मंत्री खुद माइक संभालकर भीड़ को नियंत्रित करने और विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने में जुटे नजर आए।
नगर निगम की ओर से तैयार किए गए मंच पर इस बार भाजपा नेताओं की अच्छी-खासी मौजूदगी दिखी। प्रवीण अग्रवाल, अमित जैन, कन्हैया पाठक, राजू साहा और विवेक सिंह समेत कई नेता मंच पर नजर आए। पहले कार्निवाल और विसर्जन के दौरान तृणमूल कांग्रेस के मंत्रियों तथा नेताओं की प्रमुख भूमिका देखने को मिलती थी। इस बार बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच मंच का नजारा भी अलग रहा।
रैंप सिस्टम से विसर्जन, डीजे पूरी तरह नदारद
सिलीगुड़ी में पहली बार प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए रैंप सिस्टम तैयार किया गया। इस बार शहर की करीब 30 से 40 प्रतिशत प्रतिमाओं का विसर्जन रैंप के जरिए किया गया। वाहनों के घाट में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए थे। पुलिस की सख्ती के कारण साउंड बाक्स और ढोल-नगाड़े तो सुनाई दिए, लेकिन डीजे नहीं दिखा। घाट से लेकर सड़कों तक अतिरिक्त निगरानी रखी गई।
'इस बार विसर्जन में ज्यादा मजा आया'
सेंट्रल कॉलोनी पूजा कमेटी के कार्यालय सचिव सौरभ नाथ ने बताया कि पूजा के छह दिनों तक मेहनत करने के बाद कार्निवाल की तैयारी को लेकर अलग से चिंता करनी पड़ती थी। इसमें अतिरिक्त खर्च और श्रम लगता था। इस बार विसर्जन के दौरान मां की विदाई के गम को भुलाने के लिए कमेटी के सदस्यों ने खुलकर नाच-गान किया।
उन्होंने कहा कि कार्निवाल और विसर्जन दोनों का अपना-अलग आनंद है, लेकिन इस बार विसर्जन में ज्यादा मजा आया। हैदरपाड़ा स्पोर्टिंग क्लब के सचिव निमाई पाल ने भी रैंप से विसर्जन को नया अनुभव बताया। उनके अनुसार, सरकार और स्थानीय प्रशासन की यह सराहनीय पहल रही। पुलिस की बेहतर निगरानी के कारण इस बार विसर्जन अपेक्षाकृत आराम से संपन्न हुआ और पूजा कमेटियों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
