सिलीगुड़ी महानंदा घाट पर रैंप के सिस्टम में खराबी से 20 मिनट रुका प्रतिमा विसर्जन, तकनीक पर उठे सवाल
सिलीगुड़ी के महानंदा घाट पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए पहली बार लगाई गई रैंप तकनीक में खराबी आने से प्रक्रिया 20 मिनट तक रुक गई।
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रैंप तकनीक में खराबी से विसर्जन में देरी (जागरण)
HighLights
महानंदा घाट पर रैंप तकनीक में आई तकनीकी खराबी।
प्रतिमा विसर्जन प्रक्रिया 20 मिनट तक रही बाधित।
नई रैंप व्यवस्था की गति और उपयोगिता पर उठे सवाल।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। महानंदा घाट पर बड़ी दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए पहली बार लगाई गई रैंप की तकनीक पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई।
जानकारी मिली है कि बुधवार सुबह को विसर्जन की शुरुआत में ही रैंप के सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण करीब 20 मिनट तक प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया रोकनी पड़ी।
20 मिनट देरी से हुआ विसर्जन
बाद में खराबी को ठीक कर सिस्टम दोबारा चालू किया गया। जिसके बाद विसर्जन की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। वहीं, एक प्रतिमा के विसर्जन में करीब 20 से 30 मिनट का समय लगने के कारण इस नई व्यवस्था की उपयोगिता और गति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि बड़ी दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से पहली बार लाल मोहन मौलिक निरंजन घाट (महानंदा किनारे) पर विशेष रैंप की व्यवस्था की गई है।
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बुधवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के सचिव प्रणव अनूप सोरेन ने इस व्यवस्था का उद्घाटन किया। इसके बाद प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई।
जानकारी मिली है कि महानंदा घाट तथा पार्वती घाट पर 24 अक्टूबर तक प्रतिमा विसर्जन की अनुमति दी गई है। पहले दिन यानी बुधवार को महानंदा घाट पर 225 प्रतिमाओं के विसर्जन की अनुमति है।
इस दौरान बड़ी प्रतिमाओं को रैंप के माध्यम से नदी तक पहुंचाकर विसर्जित करने की योजना है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुमार शुरुआत में तकनीकी बाधा जरूर आई, लेकिन सिस्टम को दुरुस्त कर विसर्जन दोबारा शुरू कर दिया गया। उनका मानना है कि ट्रायल रन के तौर पर छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है।
अधिकारियों का मानना है की बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जन करने में समय नहीं लगेगा, धीरे-धीरे कार्य प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
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