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चिकन नेक में ड्रग्स तस्करी का बढ़ता जाल, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को बना रहे मोहरा

Published: Sat, 10 Oct 2026 10:54 PM (IST)

सिलीगुड़ी के चिकन नेक क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी का जाल तेजी से फैल रहा है, जहाँ 2020 से 2026 तक 757 मामले दर्ज हुए और 1300 गिरफ्तारियाँ हुईं।

चिकन नेक में ड्रग्स तस्करी का बढ़ता खतरा (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

चिकन नेक में ड्रग्स तस्करी का बढ़ता खतरा (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. चिकन नेक में ड्रग्स तस्करी का बड़ा नेटवर्क।

  2. 2020-2026 तक 757 मामले, 1300 गिरफ्तारियाँ।

  3. न्यायिक देरी और नए तरीके पुलिस की चुनौती।

जागरण , सिलीगुड़ी । चिकन नेक में मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क पुलिस के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से सितंबर 2026 तक मादक पदार्थों की तस्करी के 757 मामले दर्ज किए गए, जबकि करीब 1,300 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इस दौरान गांजा, ब्राउन शुगर और हेरोइन समेत बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए। इसके बावजूद तस्करी का सिलसिला थम नहीं रहा है। तस्कर मादक पदार्थों को पहुंचाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। महिलाओं के साथ ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाया जा रहा है।

सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अंतर्गत भक्तिनगर, प्रधान नगर, माटीगाड़ा, बागडोगरा, सिलीगुड़ी, भोरेर आलो और एनजेपी थानों की पुलिस लगातार अभियान चला रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में गिरफ्तार होने वाले 40 प्रतिशत से अधिक आरोपित मालदा के रहने वाले हैं। वर्ष 2026 में सितंबर तक मादक पदार्थों की तस्करी के 86 मामले दर्ज किए गए। इनमें माटीगाड़ा थाना क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 23 मामले सामने आए। प्रधान नगर में 15 और बागडोगरा में 12 मामले दर्ज किए गए।

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से सितंबर 2026 तक कुल 757 मामले दर्ज हुए और करीब 1,300 आरोपित गिरफ्तार किए गए। अलग-अलग वर्षों में दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

वर्ष 2021 में सबसे अधिक 191 मामले दर्ज किए गए और 330 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2023 में 138 मामले सामने आए, जबकि 229 गिरफ्तारियां हुईं। सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के कमिश्नर सैयद वकार रजा ने बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

आरोपितों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की जब्ती के साथ तस्करी में शामिल लोगों की संपत्तियां भी अटैच की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि कमिश्नरेट में एंटी नारकोटिक्स टास्क टीम गठित की गई है। इसके अलावा एसओजी और डीडी की टीमें भी अभियान चला रही हैं।

लोगों तक हेल्पलाइन की जानकारी पहुंचाने के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं। स्कूलों और मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने का प्रयास किया जा रहा है।

सुनवाई में देरी भी बन रही चुनौती

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में देरी भी चुनौती बढ़ा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक वर्ष में दर्ज 50 मामलों में महज पांच की सुनवाई पूरी हो पाती है।

उनके अनुसार, जमानत पर छूटने के बाद कुछ आरोपित फिर से तस्करी में जुट जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना और नशामुक्ति केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी है।