विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बंगाल: शांतिनिकेतन के विश्व बांग्ला शिल्पी हाट का नाम बदला, लगा गेरुआ रंग का बोर्ड 

Published: Mon, 12 Oct 2026 11:33 PM (IST)

बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शांतिनिकेतन के 'विश्व बांग्ला शिल्पी हाट' का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगाल शिल्पी हाट' किया गया है।

शांतिनिकेतन के विश्व बांग्ला शिल्पी हाट का नाम बदला

शांतिनिकेतन के विश्व बांग्ला शिल्पी हाट का नाम बदला

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार की पहचान रहे नामों व प्रतीकों में बदलाव का सिलसिला जारी है। अब शांतिनिकेतन के प्रांतिक इलाके में स्थित ‘विश्व बांग्ला शिल्पी हाट’ का नाम भी बदल दिया गया है। इसका नया नाम ‘पश्चिम बंगाल शिल्पी हाट’ रखा गया है।

हाट का पुराना नीला-सफेद साइनबोर्ड हटाकर गेरुआ रंग का नया बोर्ड लगाया गया है। अगले साल मार्च तक यहां छह राज्य स्तरीय हस्तशिल्प मेले के आयोजन की योजना है। राज्य की भाजपा सरकार ने इससे पहले सरकारी वेबसाइटों व सार्वजनिक परिसरों से ‘विश्व बांग्ला’ का लोगो हटाकर अशोक स्तंभ लगा दिया था।

'बांग्लार बाड़ी आवास' योजना का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगाल आवास' ‘सबूज साथी’ का नाम ‘सारथी’ और 'कन्याश्री' का नाम 'कन्या रत्न' किया जा चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा वस्त्र विभाग ने लंबे समय से पर्यटकों की कमी से जूझ रहे इस हस्तशिल्प केंद्र को नए सिरे से विकसित करने और यहां के कलाकारों कारीगरों की आमदनी बढ़ाने की योजना बनाई है।

यहां खानपान के स्टाल, जिलों के पर्यटन की जानकारी देने वाली सुविधाएं, लुप्त होती लोक संस्कृति से परिचय कराने वाली गतिविधियां और स्थानीय व्यंजनों की व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा रहा है। उद्देश्य है कि हाट में पर्यटकों की आवाजाही बढ़े, कारीगरों के उत्पादों की बिक्री हो और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार हों।

ममता बनर्जी ने किया था उद्घाटन

मालूम हो कि इस हस्तशिल्प केंद्र का उद्घाटन 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था। प्रांतिक रेलवे स्टेशन के पास सोनाझुरी से कंकालीतला जाने वाली सड़क के बाईं ओर करीब चार एकड़ जमीन पर यह हाट है। यहां लगभग 130 कारीगरों के लिए अपने उत्पाद बेचने की व्यवस्था है। दूर-दराज से आने वाले कारीगरों के ठहरने के लिए आवास भी हैं।

इतनी सुविधाएं होने के बावजूद यह केंद्र लोकप्रिय नहीं हो सका। कारीगरों की शिकायत है कि शांतिनिकेतन आने वाले पर्यटक सोनाझुरी के खोवाई हाट बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, लेकिन पास स्थित इस हाट में कम आते हैं। इसकी वजह प्रचार की कमी और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त पहल का अभाव है। ग्राहकों की कमी के कारण कारीगरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।