राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला व मवेशी तस्करी कांड के बाद अब बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। बांकुड़ा जिले में इसका पर्दाफाश हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सामाजिक-आर्थिक सर्वे के लिए बांकुड़ा की जिलाधिकारी राधिका अय्यर ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के सर्वे का काम आशा की वर्करों को दिया था।

जिलाधिकारी खुद कर रही हैं जांच

बता दें कि पिछले मंगलवार को जिलाधिकारी खुद वर्करों के साथ फील्ड विजिट पर गई थीं। वहां जांच में पता चला कि सही आवेदकों को आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। आशा कर्मियों ने कहा है कि अब वे ये सर्वे नहीं कर सकतीं, क्योंकि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना की आवेदन सूची में बांकुड़ा जिले के 2,500 लाभार्थियों के नाम हैं। बांकुड़ा के जयपुर के सलदा गांव में आशा और आइसीडीएस कर्मी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं।

गलत लोगों को मिला योजना का लाभ

सूची की जांच करते समय पता चला है कि इसमें उनका भी नाम है, जिनके पास पहले से पक्का मकान हैं। बंगाल के विभिन्न जिलों में चल रहे इस सर्वे में कई लोगों के नाम कट सकते हैं। आशा कर्मियों की आशंका है कि अगर वे किसी के नाम को सूची से हटाती हैं या सर्वे के बाद किसी का नाम हटता है तो उनके लिए परेशानी हो सकती है। उन्हें उसी इलाके में काम करना है। कुछ का कहना है कि यह काम उनका नहीं है। उन्हें खतरे में डाला जा रहा है। उनपर सरकार अतिरिक्त काम लाद रही है।

जिलाधिकारी ने मकान मालिको से की बात

जिलधिकारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कई घरों में जाकर मकान मालिक से बात की और जांच की है। यह देखा जा रहा है कि वे वास्तव में मकान पाने के योग्य है या नहीं? अधिकारी जांच करेंगे कि तभी उनके आवेदन को आगे बढ़ाया जाएगा। उसके बाद ही वेरीफिकेशन के दस्तावेज जमा होंगे।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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