कोलकाता, राज्य ब्यूरो।  कुछ अदृश्य दैवीय शक्तियों ने जीवनभर मेरा मार्गदर्शन किया है और मेरा पूरा ध्यान संतूर शिक्षा पर केंद्रीत किया है। संगीत किसी संगीत कार्यक्रम के जरिये नहीं बल्कि संगीत यहां दिल और दिमाग में हर समय चलता है। श्री सिमेंट एवं सामाजिक संस्था प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘एक मुलाकात’ कार्यक्रम के ऑनलाइन सत्र में संतूर महानायक पंडित शिव कुमार शर्मा ने यह बातें कही। वह लेखिका और कला ज्ञानी इना पुरी के साथ विचारों के आदान प्रदान के दौरान अपनी पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे।

इस ऑनलाइन सत्र में देश के बड़े से बड़े और छोटे से छोटे शहरों में मौजूद सैकड़ों संगीत प्रेमियों और प्रशंसकों के साथ वह इस ऑनलाइन सत्र के जरिये जुड़े थे।

समाज में परिवर्तन के अनुसार लोगों की श्रद्धा और प्रतिक्रिया बदल जाती है

एक सवाल के जवाब में कि उन्होंने दर्शकों के दिल में वर्षों अपनी अमिट छाप कैसे छोड़ दी, पं. शर्मा ने कहा, समाज में परिवर्तन के अनुसार लोगों की श्रद्धा और प्रतिक्रिया बदल जाती है। 50 के दशक तक हम लंबी अवधि के लिए खेलते थे क्योंकि लोगों के पास अधिक समय था और टिकट इतने महंगे नहीं थे। समय के साथ, कार्य स्थल के परिवर्तन और अन्य चीजों को एक साथ रखा गया। हमें अपनी प्रस्तुति को उसी के अनुसार बदलना पड़ा। पंडितजी ने संतूर बजाते हुए अपने जीवन के कई आध्यात्मिक अनुभवों को याद किया। उन्होंने कहा, मैंने पुणे में ओशो आश्रम में एक घंटे तक बिना ब्रेक के संतूर बजाया। आखिर में कोई ताली नहीं बजती थी। सभी लोग बंद आंखों के साथ बैठे मिलते थे, फिर मैंने उन्हें परेशान किए बिना कार्यक्रम का अंत कर दिया।

सफल होने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़ा होना उतना महत्वपूर्ण नहीं

एक सवाल के जवाब में कि पंडित जी, सफलता के लिए बॉलीवुड कनेक्शन होना कितना महत्वपूर्ण है? पं. शर्मा ने कहा कि उन्हें लगता है कि सफल होने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़ा होना उतना महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि ऐसे कई संगीतकार हैं, जो फिल्म उद्योग से कभी जुड़े नहीं हैं। कोविड-19 संक्रमण की इस कठिन घड़ी में अपने जीवन पर विचार करते हुए पंडितजी ने कहा, यह समय खुद के भीतर झांककर आत्ममंथन करने और खुद को महसूस करने का बहुत अच्छा समय था कि आप कौन हैं। अचानक हम एक वास्तविकता के साथ आमने-सामने होते हैं जो जीवन में एक अलग तरह का अहसास लाता है और हम जीवन और प्रकृति के बारे में बहुत सी बातें सीखने लगते हैं। 

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