संदीप घोष की सुप्रीम जमानत से भड़के आरजी कर पीड़िता के पिता, सीबीआई पर उठाए सवाल
आरजी कर मामले में पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर पीड़िता के पिता ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।

संदीप घोष की जमानत पर भड़के आरजीकर पीड़िता के पिता
HighLights
आरजी कर पीड़िता के पिता ने सीबीआई पर सवाल उठाए।
पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
जांच में धीमी गति और लापरवाही पर आक्रोश व्यक्त किया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। आरजी कर दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता के पिता ने पूर्व प्राचार्य डा. संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) के खिलाफ तीखा आक्रोश जताया है।
उन्होंने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संस्था पर देश के 147 करोड़ लोग भरोसा करते हैं, यदि उसी की जांच में लापरवाही हो तो जनता उस पर विश्वास कैसे करेगी? उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘जिस संस्था में काम करने पर वेतन मिलता है और काम नहीं करने पर घूस मिलती है, उसके बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता।’
पीड़िता के पिता की यह प्रतिक्रिया आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोपित डा. संदीप घोष को 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद सामने आई है।
बता दें कि वर्ष 2024 में नौ अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के सेमिनार कक्ष में ड्यूटी पर तैनात एक युवा महिला चिकित्सक का क्षत-विक्षत शव मिला था।
इस घटना ने न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। उस समय डा. संदीप घोष अस्पताल के प्राचार्य थे। बाद में अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआइ ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
दो साल में 147 में से सिर्फ सात गवाहों के बयान
पीड़िता के पिता ने दावा किया कि सीबीआइ के जांच अधिकारी मनीष उपाध्याय से उनकी फोन पर बात हुई है। अधिकारी ने कथित तौर पर उनसे कहा कि एजेंसी के पास ज्यादा कुछ करने का विकल्प नहीं था और मामले में अभी और समय की जरूरत है।
पिता के अनुसार, जांच अधिकारी ने बताया कि 147 गवाहों में से अब तक केवल सात के बयान दर्ज किए जा सके हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या दो साल का समय भी जांच के लिए पर्याप्त नहीं है? उन्होंने कहा कि सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
यदि पुलिस अपना काम ठीक से नहीं करती तो सरकार क्या कर सकती है? इसी तरह सीबीआइ भी एक जांच एजेंसी है और यदि वह ठीक से काम नहीं करती, तो दूसरे लोग क्या कर सकते हैं? हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि सीबीआइ की इस तरह की कार्यप्रणाली को जनता लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी।
धीमी सुनवाई के आधार पर मिली जमानत
संदीप घोष को आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दो साल से अधिक समय जेल में रहने के बाद जमानत मिली है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील ने मामले की सुनवाई में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष की ओर से 147 गवाहों का उल्लेख किए जाने के बावजूद अब तक केवल सात के बयान दर्ज हो सके हैं।
बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी दलील दी कि जांच और सुनवाई में लंबे समय तक प्रगति नहीं होने की स्थिति में किसी आरोपित को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत दी।
पीड़िता के पिता ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनियमितताओं के मामले में संदीप घोष को जमानत मिलने के लिए सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने चाहिए। संदीप घोष को जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता की नाराजगी ने एक बार फिर आरजी कर मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
