जागरण संवाददाता, कोलकाता। रेलवे बोर्ड में सदस्य पद दिलाने के नाम पर कथित ठगी के मामले में भाजपा नेता मुकुल राय को गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर एक बार फिर अंतरिम राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने 18 सितंबर तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश शहीदुल्ला मुंशी की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया। इस मामले पर अब 16 सितंबर को सुनवाई होगी। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस मुंशी और न्यायमूर्ति एस दासगुप्ता की पीठ ने मुकुल को जांच में सहयोग का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुकुल को तलब करने से 72 घंटे पहले नोटिस भेजना होगा।

बता दें कि गुरुवार को कोर्ट से मुकुल को गिरफ्तारी से मिला संरक्षण गुरुवार आधी रात को समाप्त हो गया था। इसके बाद गुरुवार को पीठ के समक्ष राय की अग्रिम जमानत याचिका आई थी, जहां न्यायमूर्ति एस मुंशी ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई को कहा था। दरअसल, ठगी के इस मामले में पहले ही मुकुल के दो करीबियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कुछ दिन पहले ही रेलवे बोर्ड में सदस्य पद दिलाने के नाम पर 46 लाख रुपये लेने के आरोप में पूर्व तृणमूल नेता और वर्तमान में भाजपा मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बावन घोष की सर्वप्रथम गिरफ्तार हुई थी। बावन मुकुल का करीबी माना जाता है। एफआइआर में मुकुल को भी नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

इसी साल जनवरी में संतु गांगुली नामक व्यवसायी ने सरसुना थाने में बावन घोष के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बावन ने रेलवे बोर्ड में सदस्य बनाने के नाम पर कई बार में 46 लाख रुपये लिया था। ये रुपये मुकुल के नाम पर ही लेने का उन्होंने आरोप लगाया। इसके बाद पिछले सप्ताह मंगलवार को बावन को गिरफ्तार किया था। बावन की गिरफ्तारी के बाद ही मुकुल ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। इस मामले में चार लोगों को नामजद किया गया है। वहीं, मुकुल ने कहा था कि झूठे मामलों में भाजपा नेताओं को फंसाया जा रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी कहा था कि कट मनी तृणमूल के लोग लिए हैं जबकि भाजपा नेताओं को फंसाया जा रहा है।

 

Posted By: Sachin Mishra

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