कोलकाता, राज्य ब्यूरो। हावड़ा के नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में शनिवार को डाक्टरों की टीम ने दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही एक 18 वर्षीय छात्रा के शरीर में ब्रेन डेड मरीज के दिल का सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट (ह्दय प्रत्यारोपण) कर दिया। इसके बाद अब 12 वर्षों से दिल की बीमारी से जूझ रही खुशी के सीने में राकेश का दिल धड़केगा। इस हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए कोलकाता व हावड़ा के बीच छह किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए पुलिस की ओर से ग्रीन कारिडोर बनाया गया था।

चार घंटे तक चला जटिल आपरेशन, छात्रा की हालत स्थिर

शनिवार दोपहर में डाक्टरों की एक टीम ब्रेन डेड मरीज का हार्ट लेकर कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से हावड़ा के आंदुल रोड स्थित नारायणा अस्पताल पहुंची। महज 20 मिनट में हार्ट कोलकाता से हावड़ा पहुंचा और इसके तुरंत बाद ही आपरेशन शुरू कर दिया गया। डाक्टरों के अनुसार, चार घंटे तक चला यह जटिल आपरेशन सफल रहा और इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। आपरेशन के बाद डाक्टरों ने छात्रा की हालत स्थिर बताई है।

कौन है खुशी शर्मा

खुशी शर्मा मध्य हावड़ा के बन बिहारी बोस रोड इलाके में रहती है। वह श्री जैन विद्यालय में बाहरवीं की छात्रा है। पिता लक्ष्मी नारायण शर्मा ने बताया कि वर्ष 2011 में पहली बार उनलोगों को पता चला कि उसे दिल की बीमारी है। इलाज शुरू हुआ। डाक्टरों ने भरसक कोशिश की कि दवाई से इलाज हो जाये, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। पिछले डेढ़ साल से उसकी परेशानी बढऩे लगी। पिछले कुछ महीनों में उसे कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके हार्ट में कई तरह के विकार थे।

दवाइयां धीरे-धीरे बेअसर होने लगी। डाक्टरों ने स्वजनों को बता दिया कि हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा खुशी को बचा पाना संभव नहीं है, लेकिन हार्ट मिलना इतना आसान नहीं था। पिछले दिनों उसे नारायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच डाक्टरों को खबर मिली कि एसएसकेएम में एक युवक की मौत हुई है और उसके स्वजनों ने अंग दान करने का फैसला लिया है। नारायणा अस्पताल की ओर से संपर्क साधा गया और हार्ट देने की सहमति बन गई।

कौन थे राकेश, जिनके दिल से खुशी को मिला जीवनदान

बताया गया कि 29 नवंबर की रात कोलकाता के लेदर काम्प्लेक्स थाना क्षेत्र अंतर्गत बांसती हाइवे पर एक सड़क हादसे में चार युवक बुरी तरह से जख्मी हुए थे। चारों दो बाइक पर सवार थे। दोनों बाइक एक ट्रक से टकरायी थी। चारों को एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने तीन को मृत घोषित कर दिया। चौथा युवक राकेश दास (22) था। राकेश की हालत बेहद गंभीर थी। उसके सिर पर चोट लगी थी। डाक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन शुक्रवार को उसे ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया। इसके बाद स्वजनों द्वारा अंग दान की सहमति से खुशी को नया जीवनदान मिला है।

हृदय प्रत्यारोपण करने वाली टीम में ये रहे शामिल

हृदय प्रत्यारोपण के लिए डाक्टरों की एक टीम बनाई गई। इस टीम में कार्डियक सर्जन डा देवाशीष दास, डा नीलांजन दत्ता, डा प्रदीप नारायण, डा मनीष शर्मा, डा रंगन कोले, डा शुभदीप दास, डा अमिताभ चट्टोपाध्याय, डा संजीवन घोष और डा जोयता नंदी शामिल थे, जिन्होंने सफलतापूर्वक हृदय प्रत्यारोपण को अंजाम दिया।

Edited By: Babli Kumari

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