गंगासागर, जागरण संवाददाता। Ayodhya Verdict. अयोध्या मसले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से राम मंदिर बनने का नहीं बल्कि भारत को आतंकवाद के गड्ढे में फेंकने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सोमवार को गंगासागर में संवाददाता सम्मेलन में पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर फिर इसी तरह नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- 'राम मंदिर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पूरे देश में प्रसन्नता है, लेकिन मैं खुश नहीं हूं। भारत का विभाजन होने के बाद भी न्यायालय अगर मुस्लिम तंत्र को उपहार के तौर पर कोई भूभाग देता है तो इसे अदूरदर्शिता की पराकाष्ठा कहा जा सकता है।'

शंकराचार्य ने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे तो भविष्य में सोमनाथ मंदिर, काशी-मथुरा को लेकर भी भूक्षेत्र पर अधिकार की बात उठ सकती है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष से अपील की कि न्यायालय अथवा शासन तंत्र कुछ भी कहे, वे खुद को बाबर का अनुयायी बताकर कलंकित ना करें। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर शंकराचार्य ने इतना ही कहा कि कोई मुसलमान अगर अत्याचार, शोषण और तिरस्कार के कारण अपना देश छोड़ना चाहता है तो उसे किसी अन्य मुस्लिम देश में बसाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसी तरह अगर किसी अन्य देश में रह रहा कोई ¨हदू उस देश को छोड़ना चाहता है तो उसे भारत, नेपाल और भूटान में बसाया जाना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि आने वाले समय में ये तीनों देश ¨हदू राष्ट्र बनने वाले हैं।

तपस्थली को भोगस्थली ना बनाया जाय

शंकराचार्य ने कहा कि विकास के नाम पर तपस्थली को भोगस्थली नहीं बनाया जाना चाहिए। गंगासागर में एयरपोर्ट, होटल, रिजॉर्ट खोलकर पर्यटन स्थल में तब्दील करके उसकी धार्मिक महत्ता कम नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री जाने के लिए काफी सुविधाएं कर दी गई हैं। ज्यादा सुविधाएं मिलने पर कोई भी जगह पिकनिक स्थल बनकर रह जाती है। इसलिए विकास के नाम पर सुविधाएं बढ़ाकर तीर्थस्थलों के मौलिक स्वरूप को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।

ममता दे पीएम को गंगासागर आने न्योता

गंगासागर मेले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के किसी भी मंत्री के शिरकत नहीं करने पर शंकराचार्य ने कहा कि अगर पीएम या उनका कोई मंत्री गंगासागर नहीं आ रहा है तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उसपर विचार करना चाहिए। ममता हाल में पीएम मोदी से मिली भी थी तो वही क्यों नहीं उन्हें गंगासागर आने का न्योता दे देती। 

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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