राज्य ब्यूरो, कोलकाता : शीतलकूची कांड को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अमीनुद्दीन खान नामक अधिवक्ता ने इसे दायर करते हुए वारदात की न्यायिक जांच कराए जाने का अनुरोध किया है। फायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने की भी गुहार लगाई गई है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई की संभावना है। गौरतलब है कि शनिवार को बंगाल विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के दौरान शीतलकूची के जोरपटकी इलाके में सीआइएसएफ के जवानों की गोली में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि तीन जख्मी हो गए थे।

सीआइएसएफ की तरफ से घटना पर सफाई पेश करते हुए कहा गया था कि सैकड़ों की तादाद में उग्र गांववालों ने जवानों को घेर लिया था और उनकी बंदूक छीनने की कोशिश कर रहे थे। आत्मरक्षा व सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए जवानों को गोलियां चलानी पड़ी थीं। वारदात के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए 72 घंटों तक कोई भी राजनीतिक दल के नेता के शीतलकूची जाने पर रोक लगा दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतलकुची की घटना पर कहा कि जो लोग मारे गए, वे भी किसी मां के बच्चे हैं। दीदी की नीति ने उनकी गोद खाली कर दी है। इससे पहले चौथे दौर के मतदान के दिन पीएम मोदी ने कहा था कि शीतलकूची में हुई घटना दुखद है। भाजपा के बंगाल की सत्ता में आने पर न्याय होगा। दीदी और उनके लोगों ने यह सब किया है। दूसरी तरफ इस घटना को लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ममता ने उकसाया नहीं होता तो यह घटना नहीं होती।

दूसरी तरफ ममता ने पलटवार करते हुए इसे केंद्रीय गृहमंत्री की साजिश करार दिया है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि पीएम को शीतलकूची की पूरी साजिश मालूम थी। उन्होंने बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम लिए बगैर कहा कि एक भाजपा नेता का कहना है कि और भी गोलियां चलनी चाहिए थीं। कुछ का कहना है कि आठ को गोली मार दी जानी चाहिए थी। इन नेताओं पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

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