राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना पर शुरू से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सियासत करती आ रही हैं, जो अब भी जारी है। पहले तो इसे बंगाल में लागू नहीं होने दिया, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को लाभ मिल जाता। जब विधानसभा चुनाव सिर पर आया और भाजपा नेताओं ने इसे मुद्दा बनाया तो कहीं सियासी नुकसान न हो जाए तो अनमने तरीके से ममता ने पत्र लिखकर योजना लागू करने पर सहमति जताई।

विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक यह कहते रहे कि ममता सरकार किसानों की सूची नहीं भेज रही है। चुनाव में तीसरी बार जीत मिलने और सीएम बनने के बाद ममता ने किसानों की सूची केंद्र सरकार को भेजी। उसी अनुसार पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद भी देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ बंगाल में भी किसान सम्मान निधि योजना के तहत पहली किस्त के रूप में सात लाख से अधिक किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये भेजे। उस समय भी ममता ने सवाल उठाया था कि दो-दो हजार रुपये ही क्यों भेजे गए? किसानों को पिछला बकाया जोड़कर 18 हजार रुपये मिलने चाहिए।

वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष की ओर से सवाल उठाया गया कि बहुत सारे असली किसानों का नाम छोड़कर तृणमूल नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के नाम भेजे गए हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए। क्योंकि तूफान पीड़ितों को राहत देने में भी ऐसे ही फर्जीवाड़ा सामने आए थे, जिसमें असली पीड़ितों को रुपये नहीं मिले और राहत राशि तृणमूल नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के खाते में पहुंच गए थे। यही वजह था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के आरोप गंभीर माने जा रहे थे। अब कहा जा रही है कि बंगाल सरकार ने केंद्र को 44.8 लाख किसानों के नाम की सूची भेजी थी, जिनमें से 9.5 लाख नामों को खारिज कर दिया गया है।

इस बाबत ममता सरकार ने नाराजगी जताते हुए केंद्र को पत्र लिखा है, जिसमें पुनर्विचार करने अनुरोध किया गया है। परंतु यहां सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक साथ 9.5 लाख नाम खारिज क्यों हुए? यह जरूरी है कि एक भी असली किसान इस योजना से वंचित नहीं हो। क्योंकि सियासी नफा-नुकसान देखने की वजह से पहले ही बंगाल के 70 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि नहीं मिल सका था। अब जब योजना शुरू हुई है तो इस पर राजनीति बंद होनी चाहिए और केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि योजना के लाभ से कोई वंचित न हो।

Edited By: Babita Kashyap