कोलकाता, जागरण संवाददाता। सियालदाह व कोलकाता स्टेशन से बंगाल में ईएमयू यानी लोकल ट्रेन चलती है। एक लोकल ट्रेन में सफर करने वाले यात्री हर साल ट्रेन में ही विश्वकर्मा पूजा मनाते हैं। यह सिलसिला 1997 में शुरू हुआ था और अभी तक चल रहा है।

ट्रेन में ही भगवान की पूजा होती है और लोगों को प्रसाद भी बाटा जाता है। हर साल विश्वकर्मा पूजा के मौके पर ट्रेन को अच्छी तरह से सजाया भी जाता है। इस बार भी डानकुनी और सियालदाह के बीच चलने वाली इस लोकल ट्रेन में विश्वकर्मा पूजा मनाई गई। चलती ट्रेन में भीड़-भाड़ के बीच ही मंत्रोच्चारण हुआ, फूल बरसाए गए और पूजा संपन्न होने पर लोगों को प्रसाद के रूप में फल भी बाटे गए।

ट्रेन में पूजा करने वाले लोगों के पास इस तरह की पूजा की एक अच्छी वजह भी है। उनका कहना है कि इससे उनका समय बचता है तो यात्रा में कोई रिस्क भी नहीं रहता है। पिछले 22 सालों से लोग विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह के समय ट्रेन में ही पूजा करते आ रहे हैं।

पूजा करने वालों में से एक अशोक सरकार कहते हैं कि शुरुआत में दिक्कत होती थी लेकिन समय के साथ चीजें आसान होती गईं और कई और लोग भी जुड़ते गए।

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