राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शिक्षक नियुक्ति घोटाले में जेल में बंद राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी अब अपना बचाव खुद करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रेसिडेंसी जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्थ ने कागज-कलम मंगवाकर उन बिंदुओं को लिखना शुरू किया है, जो मामले में उनका पक्ष मजबूत कर सके। पता चला है कि उनके अधिवक्ताओं के जेल में मिलने आने के समय वे उन बिंदुओं को लिखी कागज की पर्ची उन्हें सौंप देंगे और अगली सुनवाई पर उसी के आधार पर जमानत की याचिका दायर करने को कहेंगे।

गौरतलब है कि शिक्षक नियुक्ति घोटाले में ईडी के हाथों गिरफ्तारी के बाद पार्थ तीन-तीन बार पार्थ की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। ईडी ने उन्हें दो बार अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ की। तीसरी बार उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पार्थ चाहते हैं कि अगली सुनवाई में उनकी तरफ से मजबूत पक्ष रखा जाए ताकि उन्हें जमानत मिल जाए। इस बाबत वे खुद भी लग गए हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर पार्थ को जेल में खाने को मिले खास पकवान

स्वतंत्रता दिवस पर प्रेसिडेंसी जेल के कैदियों के लिए खाने-पीने की खास व्यवस्था की गई थी। नियमित भोजन के बदले उस दिन खास पकवान परोसे गए, जिनमें मछली और दही भी शामिल थी। सूत्रों ने बताया कि भात, मूंग की दाल, साग, मछली, परवल की सब्जी, चटनी के साथ दही कैदियों को खाने को दिया गया। पार्थ ने दूसरे कैदियों की तरह छककर खाया। पार्थ ने स्वतंत्रता दिवस पर ज्यादातर समय अपने सेल में ही किताबें पढ़ते हुए बिताया। वे इस समय 'श्रीरामकृष्ण कथामृतÓ का अध्ययन कर रहे हैं। 

जेल अधिकारियों ने ठुकराया था दो बार चावल देने की मांग

मालूम हो कि तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी प्रेसीडेंसी केंद्रीय सुधार गृह में बंद हैं। यहां के अधिकारियों ने चिकित्सकीय आधार पर दोनों समय के भोजन में चावल की मांग को खारिज कर दिया था। एक अधिकारी ने कहा था कि वर्षों से प्रथा के अनुसार, एक कैदी को दोपहर के भोजन में चावल और रात के खाने में रोटी दी जाती है। चटर्जी ने अनुरोध किया था कि चावल दोपहर और रात के खाने दोनों में परोसा जाए। उन्हें रविवार को अन्य कैदियों की तरह मछली की पेशकश की गई थी। सुधार गृह नियमों के अनुसार कि रविवार को मांसाहारी भोजन परोसा जाता है।

Edited By: Priti Jha