राज्य ब्यूरो, कोलकाता । शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की जमानत की आस छूटती जा रही है। जमानत के लिए न्यायाधीश के सामने फूट-फूट कर रोने वाले और बार-बार अस्वस्थ होने का हवाला देने वाले पार्थ को इस बार जब अदालत में पेश किया गया तो उन्होंने जमानत के लिए आवेदन ही नहीं किया, जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जल्द जमानत मिल पाना मुश्किल

कानून के जानकारों का कहना है कि पार्थ भली-भांति समझ गए हैं कि उनपर जिस तरह के आरोप लगे हैं और केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास उनके खिलाफ जिस तरह के सुबूत हैं, उनमें उन्हें जल्द जमानत मिल पाना बेहद मुश्किल है इसलिए आवेदन करके कोई फायदा नहीं होने वाला है। पार्थ के अलावा स्कूल सेवा आयोग की सलाहकार कमेटी के पूर्व सदस्य शांति प्रसाद सिन्हा व अशोक साहा और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली को भी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इन तीनों ने हालांकि जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे नामंजूर कर दिया गया।

अदालत ने इलाज को लेकर जेल प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

गत 23 जुलाइ को गिरफ्तारी के बाद पार्थ कुछ दिन ईडी की हिरासत में रहे, उसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, फिर सीबीआइ ने उन्हें अपनी हिरासत में लिया और अब उन्हें फिर से 19 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

दूसरी तरफ अदालत ने पार्थ के इलाज को लेकर जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। पार्थ के अधिवक्ता ने अदालत में दावा किया था कि उनके मुवक्किल का जेल में ठीक तरीके से इलाज नहीं किया जा रहा है। उन्हें रोज 21 दवाएं खानी पड़ती है। उनके स्वास्थ्य पर निरीक्षण की जरुरत है। दूसरी तरफ शांति प्रसाद सिन्हा के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को जेल में ठीक तरह से खाना नही दिया जा रहा है। 

Edited By: PRITI JHA

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