विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नवाचारी शिक्षक : पलाश की पाठशाला में पढ़ाई की तरीका हुआ स्मार्ट

By Vishal ShreshthaEdited By: Narender Sanwariya
Published: Wed, 09 Sep 2026 06:34 PM (GMT+05:30)

पलाश चौधरी ने प्रौद्योगिकी का उपयोग कर अपने स्कूल को डिजिटल बनाया, जिससे बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी। उनकी ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. प्रौद्योगिकी से स्कूल को बनाया पूर्ण डिजिटल।

  2. मोबाइल एप 'उत्तरन' से अभिभावकों को जोड़ा।

  3. बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी, मिला राष्ट्रीय पुरस्कार।

विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। प्रौद्योगिकी बचपन से ही उन्हें आकर्षित करती थी। मन में इंजीनियर बनने की ख्वाहिश थी, लेकिन पारिवारिक व आर्थिक परिस्थितियों के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पाया। इंजीनियर नहीं बन पाए तो अध्यापन की राह चुनकर प्रौद्योगिकी को अपना साथी बना लिया और इसके जरिये अपने स्कूल का हुलिया बदल डाला। ये हैं पलाश चौधरी। बंगाल के पूर्व बर्द्धमान जिले के श्री रामकृष्ण शारदा विद्यापीठ प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक। 45 वर्षीय पलाश की पाठशाला में हाजिरी से लेकर कक्षा, दिनचर्या, परीक्षा व गृहकार्य तक सब स्मार्ट तरीके से संचालित होते हैं।

पलाश ने मोबाइल एप के जरिये बच्चों व अभिभावकों को स्कूल से मजबूती से जोड़ा है। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई व उनकी गतिविधियों की जानकारी घर बैठे मिल जाती है। उनके प्रयास से स्कूल में बच्चों की संख्या तीन गुना तक बढ़ी है। पलाश को उनकी अभिनव पहल के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है। पलाश 2016 में जिले के सर्वश्रेष्ठ प्रधान शिक्षक व 2022 में बंगाल सरकार के ‘शिक्षा रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

PALASH-1

26 साल से अध्यापन कर रहे पलाश ने 2011 में श्री रामकृष्ण शारदा विद्यापीठ प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली। वह कहते हैं कि 2014 में कर्नाटक, तमिलनाडु व उत्तराखंड जैसे राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को देखकर मुझे महसूस हुआ कि बंगाल में भी ऐसी पहल की जरूरत है। कोरोना महामारी के दौर ने यह और स्पष्ट कर दिया कि प्रौद्योगिकी के बिना शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाना मुश्किल है। इसी सोच के साथ उन्होंने 2023 में ‘उत्तरन’ नामक मोबाइल एप शुरू किया। इसके जरिये उन्होंने स्कूल की पढ़ाई को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर अभिभावकों के मोबाइल तक पहुंचाया। बच्चे की उपस्थिति, शैक्षणिक प्रगति, गृहकार्य, परीक्षा और स्कूल की गतिविधियों से जुड़ीं समस्त जानकारियां अभिभावकों को हाथों हाथ मिलने लगी।

चेहरे से दर्ज होती है हाजिरी : पलाश ने स्कूल में स्कैनर और फेस आइडी की व्यवस्था कर उसे मोबाइल एप से जोड़ा। बच्चा जैसे ही फेस आइडी के सामने खड़ा होता है, उसकी उपस्थिति दर्ज हो जाती है। अभिभावकों के मोबाइल में एप होने पर उन्हें तत्काल पता चल जाता है कि उनका बच्चा स्कूल पहुंच गया है। छुट्टी के बाद उसके स्कूल से निकलने की जानकारी भी मिल जाती है। पलाश ने अपनी पाठशाला को जिले के पहले पूर्ण डिजिटल स्कूल के रूप में विकसित किया। यहां सभी कमरों में स्मार्ट कक्षाएं चलती हैं। पूरा स्कूल वाई-फाई सुविधा से जुड़ा है। छह कमरों वाले इस स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं। स्कूल सुबह की पाली में संचालित होता है।

मध्याह्न भोजन के पहले नाश्ता : पलाश की पहल प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्कूल में बच्चों के लिए नाश्ते की भी व्यवस्था की। करीब 300 बच्चों को रोज नाश्ता दिया जाता है। पलाश कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है, लेकिन मेरे स्कूल में बच्चों के लिए सुबह के नाश्ते की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। मेरा यही प्रयास है कि बच्चे खाली पेट कक्षा में न बैठें ताकि पढ़ाई पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकें। इसपर हर महीने लगभग 60,000 रुपये खर्च होते हैं। यह खर्च मैं लावण्य राय नामक सह शिक्षक व अपने मित्र डाक्टर रासबिहारी धानी के साथ मिलकर वहन करता हूं। पलाश ने बच्चों की रचनात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए स्कूल में लेखन क्लब भी शुरू किया गया है। स्कूल में कम उम्र से ही बच्चों को प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाता है।

विद्यार्थियों की संख्या तीन गुना बढ़ी : पलाश की पहल का बच्चों की संख्या पर भी असर दिखा है। कोरोना महामारी के बाद स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या घटकर 99 रह गई थी, जो तीन गुना बढ़ी है। स्कूल के बच्चे आज विभिन्न प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व कर पुरस्कार जीत रहे हैं। बर्द्धमान शहर के रहने वाले पलाश ने 2001 में अध्यापन शुरू किया था। उन्होंने भौतिकी में विज्ञान स्नातक तक पढ़ाई की है। परिवार में मां, पत्नी और आठ साल की बेटी है। पलाश मुख्य रूप से बच्चों को विज्ञान पढ़ाते हैं।


मोबाइल एप की और खासियत

-बच्चे के किसी दिन स्कूल नहीं आने पर उसे उस दिन की पढ़ाई की जानकारी मिल जाती है।
-प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति का रिकार्ड एप पर अपलोड व नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।
-गृह कार्य मोबाइल एप के जरिये ही दिया जाता है।
-परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ीं जानकारियां उपलब्ध रहती हैं।
-उत्तर पुस्तिकाएं भी एप पर अपलोड की जाती हैं।
-दिनचर्या में बदलाव होने पर पहले से सूचना दे दी जाती है।