विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

असम में एनआरसी के मुद्दे पर, दिलीप घोष के बयान के विरोध में लोगों ने रोकी ट्रेन

By Preeti jhaEdited By:
Published: Wed, 01 Aug 2018 01:06 PM (IST)Updated: Wed, 01 Aug 2018 04:16 PM (IST)

ममता फिलहाल जहां असम एनआरसी पर ही सवाल उठा रही हैं, ऐसे में बीजेपी नेता दिलीप घोष का बयान भी काफी महत्वूण है।

असम में एनआरसी के मुद्दे पर, दिलीप घोष के बयान के विरोध में लोगों ने रोकी ट्रेन
असम में एनआरसी के मुद्दे पर, दिलीप घोष के बयान के विरोध में लोगों ने रोकी ट्रेन

कोलकाता, जेएनएन। असम में एनआरसी के मुद्दे पर मतुआ संप्रदाय के संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान के विरोध में लोगों ने ट्रेनों की आवाजाही में बाधा उत्‍पन्‍न कर दी हैं। जिससे लाखों यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

असम में एनआरसी के मुद्दे पर मतुआ संप्रदाय के संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान के विरोध लोगों ने आज सियालदह मेन लाइन के विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेन रोक दी। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खासकर सुबह ऑफिस जाने वाले यात्रियों तथा स्कूली बच्चों को काफी दिक्कत हुई। 

सत्ता में आने पर बंगाल में लागू करेंगे NRC

दरअसल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने पर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करेगी और बांग्लादेश से अवैध रूप से राज्य में आये एक करोड़ बांग्लादेशियों को बाहर निकालेगी। घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कहा था कि असम में एनआरसी भाजपा लागू नहीं कर रही है। वरन इसके पहले वहां की कांग्रेस सरकार ने इसे शुरू किया था और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर एनआरसी का प्रारूप पेश किया गया है और इसमें संशोधन की पूरी गुंजाइश है। 

उन्होंने कहा था कि भाजपा ने घोषणा की है कि 30 नंवबर 2015 तक भारत में आये शरणार्थियों को नागरिकता दी जायेगी, लेकिन बांग्लादेश से घुसपैठ कर आये लोगों को बाहर निकाला जायेगा।  उन्होंने कहा था कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें भी बाहर निकाला जायेगा। घोष ने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस वोट की राजनीति कर रही है और रोहिंग्या का भी पेश ले रही है, लेकिन देश के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने शरणार्थियों के लिए कुछ भी नहीं किया।

लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस मामले में सरकार का कोई दखल नहीं है और सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि असम की जो लिस्ट आई है वह अंतिम नहीं है और सभी को 28 अगस्त के बाद अपनी बात कहने का मौका मिलेगा।

उधर, असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का दूसरा ड्राफ्ट आने पर अभी सियासत थमी भी नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भी इसी तर्ज नागरिकों की पहचान कराने की बात कही है। बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार आती है असम की तरह ही बंगाल में भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जारी किया जाएगा। असम में एनआरसी के सम्पूर्ण मसौदे को जारी करने के समर्थन में उन्होंने कहा कि कुछ नेता 'घड़ियाली आंसू' बहा रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी 'वोट बैंक' की राजनीति के खत्म होने का अंदेशा है।

बता दें कि असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम मसौदा सोमवार को जारी कर दिया गया। असम देश में एक मात्र ऐसा राज्य है जहां एनआरसी जारी किया गया है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य के कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम हैं। जबकि करीब 40 लाख लोग अवैध पाए गए हैं।

 अवैध नागरिकों को भेजेंगे बांग्लादेश

 दिलीप घोष ने कहा, 'अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है तो हमलोग राज्य में भी एनआरसी लागू करेंगे। हमलोग अवैध नागरिकों को बांग्लादेश वापस भेजेंगे। आने वाले दिन मुश्किल भरे हैं। हमलोग किसी अवैध प्रवासी को पश्चिम बंगाल में नहीं बर्दाश्त नहीं करेंगे।' इतना ही नहीं घोष ने यहां तक कह दिया कि जो लोग अवैध प्रवासियों का समर्थन करते हैं उन्हें भी देश से निकाल बाहर किया जाएगा। घोष ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में असम में एनआरसी लागू किया गया है। यह कांग्रेस ही थी जिसने एनआरसी का विचार पेश किया था। अब वे इसके खिलाफ बोल रहे हैं।'

 उन्होंने कहा, 'जिन लोगों के नाम अंतिम मसौदे में नहीं हैं वे संशोधन के लिए अपील कर सकते हैं लेकिन हमलोग देश की सुरक्षा एवं अखंडता से कोई समझौता नहीं करेंगे।' बता दें कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने पड़ोसी राज्य असम में एनआरसी को लेकर विरोध जताया है। सीएम ममता बनर्जी ने असम एनआरसी पर कहा कि कई लोगों के पास आधार कार्ड और पासपोर्ट होने के बावजूद उनका नाम ड्राफ्ट में नहीं है और सही दस्तावेजों के बावजूद लोगों को ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया। ममता का कहना है कि काफी लोगों को सरनेम की वजह से बाहर किया गया है। 

ममता फिलहाल जहां असम एनआरसी पर ही सवाल उठा रही हैं, ऐसे में बीजेपी नेता दिलीप घोष का बयान भी काफी महत्वूण है। क्योंकि अगर राज्य में सत्ता परिवर्तन होने की स्थिति में ऐसा कुछ होता है तो सियासत और भी गरमा कर सकती है।