हावड़ा, ओमप्रकाश सिंह। जान है तो जहां है। पूरे दिन काम करने अथवा कार्यालय में गुजारने के बाद घर लौटते समय लोग घबरा जाते हैं। उन्हें काफी जल्दबाजी होती है कि घर लौटने की। उन्हें इस बात का थोड़ा भी एहसास नही होता है कि घर में बाल बच्चे उनका इंतजार कर रहें हैं। इसी जल्दबाजी में उनके साथ हादसा हो जाता है।

हादसा सड़क पर हो अथवा रेलवे ट्रैक पर हो। हावड़ा शाखा में किसी भी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद बस स्टैंड तक जाने के लिए रेलवे द्वारा फ्लाईओवर बनाया गया है। इसकी मदद से वे आसानी से स्टेशन से बाहर निकल सकते हैं।

रेलवे की जागरूकता के बावजूद प्रति दिन हजारों लोग रेलवे एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं। रेलवे पुलिस द्वारा जुर्माना लगाने के बावजूद भी लोग रेलवे ट्रैक पार कर एक प्लेटफार्म से दूसरे दूसरे फ्लेटफार्म पर जाने से बाद नही आ रहें हैं।

यात्रियों की लापरवाही का आलम यह है कि वे हमेशा रेल की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। कभी मोबाइल फोन बात करते हुये ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं तो कभी आती ट्रेन को देखकर तेजी से ट्रैक पार करने की चक्कर में लोगों की कटकर मौत हो रही है। एक आंकड़ा के अनुसार प्रति माह दो दर्जन से अधिक परिवार अनाथ हो रहा है। इसके बावजूद लोग सबक लेने को तैयार नही है। हावड़ा रेलवे पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार पिछले पांच वषरे में ट्रेन से कटकर 1632 लोगों की मौत हो गई है।

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014 में ट्रेन से कटकर 420 लोगों की, वर्ष 2015 में 349 लोगों की,वर्ष 2016 285 लोगों की, वर्ष 2017 में 269 लोगों की और वर्ष 2018 में 309 लोगों की मौत हो गई है।

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