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बंगाल: पूजा में ड्यूटी से गायब रहे डॉक्टर तो होगी कार्रवाई, NBMCH में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की कड़ी निगरानी

Published: Fri, 16 Oct 2026 09:20 PM (IST)

उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एनबीएमसीएच) ने दुर्गापूजा के दौरान मरीजों को निर्बाध इलाज सुनिश्चित करने के लिए ड्यूटी रोस्टर का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया है।

एनबीएमसीएच में पूजा के दौरान ड्यूटी रोस्टर का कड़ाई से पालन।

एनबीएमसीएच में पूजा के दौरान ड्यूटी रोस्टर का कड़ाई से पालन।

HighLights

  1. एनबीएमसीएच में पूजा के दौरान ड्यूटी रोस्टर का कड़ाई से पालन।

  2. अनुपस्थित डॉक्टरों और कर्मचारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई।

  3. ओपीडी व आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। दुर्गापूजा के दौरान उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एनबीएमसीएच) में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए केवल ड्यूटी रोस्टर तैयार करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की भी व्यवस्था की जा रही है।

पूजा के दिनों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति या स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए अस्पताल प्रशासन को निगरानी के साथ जवाबदेही भी तय की जा रही। गायब रहने वाले डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

इस बार अस्पताल प्रशासन ने पूजा के दौरान ओपीडी सेवा सुचारू रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए रोस्टर भी तैयार कर लिया गया है। अब इसकी असली परीक्षा रोस्टर के जमीन पर लागू होने के साथ शुरू होगी।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अष्टमी को छोड़कर पूजा के अन्य दिनों में ओपीडी सामान्य दिनों की तरह खुली रहेगी। इस वर्ष अष्टमी रविवार को है। रविवार को नियमित रूप से ओपीडी बंद रहती है। ऐसे में सप्तमी, नवमी और दशमी को मरीजों को डॉक्टरोंसे परामर्श मिलने की व्यवस्था रहेगी।

अस्पताल प्रशासन ने सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी के लिए विभागवार रोस्टर तैयार किया है। इसकी सूची स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गई है। मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, ईएनटी, नेत्र और हड्डी रोग सहित प्रमुख विभागों में डॉक्टरोंकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी है। हालांकि, रोस्टर तैयार होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसके पालन का है।

डॉक्टरोंकी जिस दिन ड्यूटी लगाई गई है, वे समय पर उपस्थित रहें और मरीजों को परामर्श देने में कोई बाधा न आए,इसकी निगरानी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उपस्थिति की नियमित जांच और अनुपस्थित रहने के कारणों की समीक्षा भी की जाएगी।

पूजा के दौरान केवल ओपीडी ही नहीं, बल्कि इनडोर और आपातकालीन सेवाओं को निर्बाध बनाए रखना भी जरूरी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आपातकालीन विभाग 24 घंटे सक्रिय रहेगा। वार्डों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है। अस्पताल अधीक्षक की निगरानी में पूरी व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

पिछले साल पांच दिन में 77 मरीजों की गई जान

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दुर्गापूजा के पांच दिनों के भीतर एनबीएमसीएच में 77 मरीजों की मौत की खबर सामने आई थी। स्वजन ने समय पर इलाज नहीं मिलने और डॉक्टरोंकी अनुपस्थिति के आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी रिपोर्ट तलब की थी।

एनबीएमसीएच के एक वर्ग का कहना है कि सप्तमी से ही व्यवस्था की असली परीक्षा शुरू होगी। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन रोस्टर के पालन को लेकर कितनी सख्ती बरतता है और मरीजों को पूजा के दौरान निर्बाध इलाज उपलब्ध कराने में कितना सफल रहता है। इस संबंध में अस्पताल अधीक्षक डा. कौशिक इश्वोर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।