राज्य ब्यूरो,  कोलकाता : नारद स्टिंग मामले में सीबीआइ को  भाजपा नेता तथा पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद सुवेंदु अधिकारी, तृणमूल सांसद सौगत रॉय, प्रसून बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार पर मुकदमा चलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी का इंतजार है।  सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि  सीबीआइ ने  अप्रैल 2019 में चारों नेताओं पर अभियोजन के लिए लोकसभा अध्यक्ष से मंजूरी मांगी थी। जिस समय यह स्टिंग ऑपरेशन किया गया था, उस समय चारों तृणमूल कांग्रेस के सांसद थे। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि 2017 में तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके मुकुल रॉय का नाम इस सूची में नहीं है। 

मुकुल रॉय और अपरूपा पोद्दार के खिलाफ अब तक कुछ नहीं मिला 

- सीबीआइ के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि उन्हें  नवंबर 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए मुकुल रॉय और तृणमूल कांग्रेस से लोकसभा सदस्य अपरूपा पोद्दार के खिलाफ 2014 के नारद स्टिंग मामले में  खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं मांगी गई थी, क्योंकि उनके खिलाफ अबतक कुछ नहीं मिला है। बहरहाल, अधिकारियों ने बताया कि जांच अब भी चल रही है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। 

सीबीआइ ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया

-सीबीआइ अधिकारी ने कुछ लोगों द्वारा एजेंसी के खिलाफ लगाए गए पक्षपात करने के आरोपों को खारिज कर दिया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से सीबीआइ द्वारा सुवेंदु अधिकारी तथा मुकुल राय के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठाया गया था। सीबीआइ ने सोमवार को बंगाल के दो मंत्रियों  फिररहाद हकीम व सुब्रत मुखर्जी, तृणमूल विधायक मदन मित्रा तथा पूर्व पार्टी नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। राज्यपाल ने सीबीआइ को सात मई को इनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे दी थी। वहीं, 2014 में स्टिंग ऑपरेशन करने वाले नारद समाचार पोर्टल के सीईओ मैथ्यू सैमुअल ने भी सवाल उठाया कि सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई तथा जांच निष्पक्ष होनी चाहिए थी।