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नंदीग्राम उपचुनाव: शुभेंदु अधिकारी की मुलाकात और ममता बनर्जी को झटके, 24 घंटे में कैसे पलटी बाजी; Inside Story

Published: Sat, 19 Sep 2026 11:21 AM (IST)

नंदीग्राम उपचुनाव में नाटकीय मोड़ आया जब ममता बनर्जी के समर्थन के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

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डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम उपचुनाव देश के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सियासी मुकाबलों में से एक बनता जा रहा था, लेकिन बीते शुक्रवार को महज कुछ ही घंटों के भीतर पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल गई।

इस नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई, जब ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के तुरंत बाद अचानक चुनाव मैदान से अपना नाम वापस ले लिया।

नंदीग्राम में नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम

इस बड़े उलटफेर के बाद जैसे ही ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता दिखाते हुए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने का एलान किया, वैसे ही सियासी पारा और चढ़ गया। समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने मिलन प्रधान को साल 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

यह अजीबोगरीब गिरफ्तारी तब और अधिक सुर्खियों में आ गई जब टीएमसी के अरूप रॉय गुट डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेता रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि यह कार्रवाई उनके गुट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हुई है। रितब्रत बनर्जी का यह धड़ा तृणमूल से अलग होकर खुद नंदीग्राम उपचुनाव लड़ रहा है।

इस तरह, जिस चुनावी मुकाबले ने पहले ही पुराने प्रतिद्वंद्वियों, बागी गुटों और नए गठबंधनों को आमने-सामने ला खड़ा किया था, वह अब एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।

जहां एक तरफ कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है, वहीं प्रतिद्वंद्वी तृणमूल गुट का साफ कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई कानून के तहत केवल लंबित आपराधिक मामलों और वारंटों के आधार पर की गई है।

राहुल गांधी ने क्या लगाया आरोप?

इस गिरफ्तारी के बाद तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार शाम को एक पोस्ट में इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध का कार्य करार दिया। उन्होंने भाजपा पर चुनाव लड़ने के बजाय चुनावी मुकाबले को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

गांधी ने कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं है। यह राजनीतिक प्रतिशोध है, लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस न तो डरेगी और न ही झुकेगी और मजबूती से लड़ेगी और जीतेगी।

डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस का पलटवार

राहुल गांधी को जवाब देते हुए रितब्रत बनर्जी ने पलटवार किया और कहा कि उनकी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने ही प्रधान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ हत्या के तीन मामले लंबित हैं और पुलिस की कार्रवाई पहले से मौजूद वारंट के आधार पर ही की गई है।

उन्होंने कहा कि हम डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मिलन प्रधान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिन पर हत्या के तीन मामले लंबित हैं। चुनाव के दौरान वारंट को तामील करना अनिवार्य होता है। शायद राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने श्री राहुल गांधी को वास्तविक जानकारी नहीं दी है।

2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े हैं मामले

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों ने बताया कि मिलन प्रधान का नाम 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए कई मामलों में आरोपी के रूप में शामिल था और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित थे। 

शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे मिलन प्रधान नंदीग्राम के रेयापारा इलाके में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

चार वारंटों में से तीन में हत्या के आरोप (आईपीसी की धारा 302) शामिल हैं। चूंकि मामले पुराने हैं और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज हैं, इसलिए अब नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धाराएं अलग होंगी (BNS में हत्या का आरोप धारा 302 की जगह धारा 103 के अंतर्गत आता है)।

दर्ज किए गए मामलों के अनुसार, पहला मामला 30 अप्रैल 2007 को नंदीग्राम पुलिस स्टेशन में केस नंबर 75/07 के रूप में दर्ज किया गया था, जिसमें आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 448, 302 व 506 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 शामिल है।

इसी पुलिस स्टेशन में 15 नवंबर 2007 को दूसरा मामला (केस नंबर 221/07) दर्ज हुआ, जो आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 326, 364, 302 और 201 के तहत है।

इसके अलावा, 8 नवंबर 2007 को नंदीग्राम में ही दर्ज तीसरे मामले (केस नंबर 188/07) में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 324, 307 व 302 के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 लगाई गई है।

वहीं, चौथा मामला खेजुरी पुलिस स्टेशन का है, जहां 30 जुलाई 2007 को केस नंबर 44/07 दर्ज किया गया था, जिसमें आईपीसी की धारा 148/149 और आर्म्स एक्ट की धारा 25/35 के तहत आरोप तय किए गए हैं।

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