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TMC के नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज होने के बाद अब ममता बनर्जी को नंदीग्राम उपचुनाव में लगा बड़ा झटका

Published: Fri, 18 Sep 2026 04:29 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 05:06 PM (IST)

बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान ने नाम वापस ले लिया है। ...और पढ़ें

ममता बनर्जी की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने नाम वापस लिया

ममता बनर्जी की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने नाम वापस लिया

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राज्य ब्यूरो, जागरण कोलकाता। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट तृणमूल गुट को 24 घंटे के भीतर एक और बड़ा झटका लगा है।

तृणमूल के दोनों गुटों के बीच जारी अधिकार की लड़ाई में चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के एक दिन बाद नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कालीघाट तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया।

नंदीग्राम वही विधानसभा क्षेत्र है, जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके पूर्व सहयोगी और तब विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने हरा दिया था।

शुभेंदु अधिकारी से की मुलाकात

नाम वापस लेने से ठीक पहले ममता बनर्जी नीत कालीघाट तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने दोपहर में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। संचिता अपने पति के साथ कोलकाता के मैदान इलाके में स्थित पीडब्ल्यूडी टेंट पहुंचीं और मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

इसके कुछ देर बाद ही उनके नाम वापस लेने की खबर है। मुलाकात के बाद उनके हवाले से कहा गया कि वह मुख्यमंत्री का आशीर्वाद लेने आईं थीं।

शिक्षक भर्ती मामले से जुड़ा रहा है संचिता का नाम

नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर लंबे समय से यह चर्चा थी कि क्या ममता बनर्जी खुद इस सीट से चुनाव लड़ेंगी और विधानसभा में वापसी करेंगी। इसी बीच उनके गुट ने रविवार को संचिता प्रधान दे को प्रत्याशी घोषित किया था।


संचिता नंदीग्राम के बोयाल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं। शिक्षक भर्ती मामले में 26,000 शिक्षकों की नियुक्तियां रद किए जाने के बाद उनकी नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी।

नंदीग्राम ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। 2021 में इसी सीट से चुनाव लड़ने के बाद वह शुभेंदु अधिकारी से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से नंदीग्राम दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

हाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद के बाद निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों को अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए हैं।

ममता बनर्जी के गुट को कालीघाट तृणमूल नाम और फुटबाल खिलाड़ी चुनाव चिह्न मिला है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट को गणतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस नाम और खाम चुनाव चिह्न दिया गया है।

ऐसे समय में नंदीग्राम से प्रत्याशी का नाम वापस लेना कालीघाट तृणमूल के लिए चुनावी रणनीति के लिहाज से बड़ा झटका माना जा रहा है।

फलता में तृणमूल प्रत्याशी ने छोड़ दिया था मैदान

बताते चलें कि इससे पहले कुछ माह पूर्व राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के बाद दक्षिण 24 परगना जिले की फलता सीट पर हुए पुनर्मतदान से ठीक एक दिन पहले तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान (पुष्पा) ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर सबको चौंका दिया था।

जिसके बाद इस सीट से भाजपा प्रत्याशी ने रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की थी। पहले यह तृणमूल कांग्रेस का गढ़ था। ऐसे में अब फलता की तरह नंदीग्राम में भी तृणमूल प्रत्याशी के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।